1 Best Gautam Budha And Angulimal Ki Hindi Kahani

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Gautam Budha And Angulimal Ki Hindi Kahani
Gautam Budha And Angulimal Ki Hindi Kahani

Gautam Budha And Angulimal Ki Hindi Kahani : तो आज के इस कहानी संग्रह में हम आप लोगों के लिए एक दिलचस्प कहानी लेकर आए हैं । इस कहानी में हम आप लोगों को गौतम बुद्ध की एक सीख बताएंगे । इसी के साथ आप लोगों को बताएंगे कि कैसे Gautam Budha ने एक डाकू का हृदय परिवर्तन किया । हम सभी जानते हैं Gautam Budha के मन की स्थिरता के बारे में और यह भी जानते हैं कि गौतम बुद्ध धर्म के प्रचारक थे।

वह सही मार्ग पर चलने के लिए सभी को हमेशा प्रेरित किया करते थे । इस कहानी से चलिए हम भी सीखते हैं कि हमें क्यों धर्म के रास्ते पर चलना चाहिए। हमें Gautam Budha की इस कहानी से क्या सीखना चाहिए तो चलिए बिना किसी देरी के हम शुरुआत करते हैं इस कहानी की जो कि है Gautam Budha और अंगूलीमल की।

1 Best Gautam Budha And Angulimal Ki Hindi Kahani

तो बहुत समय पहले की बात है एक गांव में एक डाकू का बहुत आतंक था । एक डाकू जिसे लोग सिर फिरा भी मानते थे। वह लोगों की हत्या कर देता था और हत्या करने के बाद उन लोगों की उंगली काट कर उसे अपने गले में माला बनाकर पहनता था इसी की वजह से उसे डाकू का नाम अंगुली मल पड़ा । अंगूलीमल से लोग बहुत ज्यादा डरा करते थे वह जंगलों में रहा करता था और गांव से पास में उड़ता हुआ वह जंगल इस प्रकार सब को डराता था कि कोई भी वहां पर जाता नहीं था ।

अंगुली मन ऐसा कहता था कि उसकी एक प्रतिज्ञा है जिसके चलते वह 100 लोगों की हत्या करेगा और 100 अंगुलियों को काटकर उनकी माला बनाकर अपने गले में पहनेगा। अंगूलीमल से लोग इसी लिए बहुत ज्यादा डरते थे क्योंकि वह अभी तक 99 लोगों की हत्या कर चुका था।

99 लोगों की उंगली को काटकर अपने गले में धारण कर चुका था एक बार की बात है गौतम बुद्ध भी उस गांव में गए गौतम बुद्ध ने साधु की वेशभूषा धारण की हुई थी। उनकी वेशभूषा देखकर Gautam Budha की आवभगत लोगों ने बहुत अच्छे से की।
गौतम बुध को इस बात से बड़ी प्रसन्नता हुई कि लोग उनकी आवभगत बहुत अच्छे से कर रहे हैं और लोगों को साधु की इतनी परवाह है उस गांव में अपने मन की स्थिरता करते हुए लिया था कि वहां के लोग कुछ डरे सहमे थे।


शुरुआती तौर पर Gautam Budha ने कुछ नहीं कहा पर गौतम बुद्ध से जब रहा नहीं गया तो उन्होंने पूछ ही लिया कि उनके डर का कारण क्या है। वह लोग क्यों इतने डरे सहमे रहते हैं । यह लोग क्यों रात होते ही अपने घरों में छुप जाते हैं और वह जंगल में जाने से क्यों डरते हैं । तो जब गांव के लोगों ने Gautam Budha को अंगूलीमल के बारे में बताया तब गौतम बुद्ध को सारा माजरा समझ में आया।

Gautam Budha ने जब यह जाना की अंगुली मने लोगों में डर पैदा किया हुआ है और वह लोगों की हत्या करता है । तब गौतम बुद्ध ने इस बात का निश्चय किया कि वह उस जंगल में जाएंगे और वहां जाकर वह अंगुली माल से भेंट करेंगे।

Gautam Budha ने उस जंगल में जाने का फैसला किया और वह उस जंगल की ओर चल दिए जंगल के पास जा रहे थे । तो अंगुलिमाल ने उन्हें दूर से ही देख लिया था और अंगुलिमाल को इस बात का अचंबा हुआ कि वह एक साधु को उस जंगल की ओर आते देख रहा था वह भी बिल्कुल अकेला ।


उसने सोचा कि यहां पर लोग इकट्ठे होकर आने से डरते हैं और वह साधु अकेला इस जंगल की तरफ चला आ रहा है। अंगूलीमल ने इस बात से आश्चर्य जताते हुए बुद्ध की ओर जाने का फैसला लिया वह गौतम बुद्ध की ओर चल दिया और उसने गौतम बुद्ध को आवाज देते हुए कहा कि तू कहां जा रहा है।

Gautam Budha उसकी आवाज सुनकर रुके नहीं और वह आगे चलते जा रहे थे चलते जा रहे थे इस बात पर अंगूलीमल को काफी ज्यादा क्रोध आ गया। अंगूलीमल में गौतम बुद्ध को अब फिर से रुकने को कहा और गौतम बुद्ध चले जा रहे थे चले जा रहे थे। अंगुली मल Gautam Budha से पूछा कि तुम हो कौन और यदि तुम नहीं रुके तो मैं तुम्हें मार डालूंगा और अपने 100 लोगों हत्याओं की प्रतिज्ञा को पूरा करूंगा।

गौतम बुद्ध ने अंगुलिमाल से कहा कि तुम अपने आप को बहुत बड़ा शूरवीर समझते हो तो तुम एक काम करो क्या तुम मुझे पास में वह पेड़ है उसकी पत्तियां तोड़ कर दिखा सकते हो । अंगुलिमाल को क्रोध आ रहा था पर उसने सोचा कि यह साधु है और क्यों ना इन की बात सही हो सकती है तो इसी की वजह से वह अपनी वीरता का प्रदर्शन करते हुए उसने कहा कि हां बिल्कुल मैं पत्तियां दूर कर आपको दे सकता हूं।


अंगुलिमाल ने ऐसा ही किया और अंगुली मल पास के पेड़ की पत्तियां थोड़ी और वह गौतम बुद्ध के सामने ले जाकर खड़ा हो गया कि यह लो मैंने पत्तियां तोड़ दी । गौतमबुद्ध ने उससे पूछा क्या तुम पत्तियों को दोबारा जोड़ सकते हो?
उसने उत्तर दिया नहीं तब गौतम बुद्ध ने कहा एक बार जो पत्तियां टूट जाते हैं फिर नही जुड़ती तो यह जानते हो तो फिर क्यों लोगों की हत्या करते हो Gautam Budha ने अंगुलिमाल से कहा कि तुम जब किसी को जीवन नहीं दे सकते हो तो फिर तुम्हें उसको मारने का भी हक नहीं है ।

गौतम बुद्ध ने कहा जिस प्रकार एक बार आप पेड़ के पत्तियों तोड़ देते हैं उन्हें दोबारा नहीं जोड़ सकते । उसी प्रकार आप इंसान को एक बार मार कर उसे दोबारा जीवित नहीं कर सकते। तो इसीलिए तुम्हारे को कोई भी अधिकार नहीं है कि तुम किसी की मौत का कारण बना अंगुलिमाल को यह बात समझ में आ गई थी ।

यह बात सुनते ही अंगूलीमल के हाथ से हथियार छूट गया और नीचे गिर गया । अंगुली मल क्षमा मांगे गौतम बुद्ध से और वह उनके पैरों में पड़ गया और अंगूलीमल ने कहा कि मैं समझ गया हूं कि मैं अब तक जो भी कर रहा था गलत कर रहा था आप मुझे क्षमा कर दीजिए।

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FAQ Related To Gautam Budha And Angulimal Ki Hindi Kahani

Who was gautam buddha ?( गौतम बुद्ध कौन थे?)

गौतम बुद्ध बौद्ध धर्म के संस्थापक थे जो धर्म का प्रचार करते थे ।

Where was Gautam Budha Born ?( गौतम बुद्ध का जन्म कहां हुआ ?)

गौतम बुद्ध का जन्म लुबिनी में हुआ था।

Final Words For Gautam Budha And Angulimal Ki Hindi Kahani

इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें कभी भी किसी प्रकार का गलत काम नहीं करना चाहिए और हमें इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि हम यदि किसी का अच्छा नहीं कर सकते तो हमें उसका बुरा करने का भी अधिकार नहीं होता तो इसी की वजह से हमें इस बात का ध्यान रखना बहुत जरूरी होता है इस हम स्वयं के साथ-साथ दूसरे का भी अच्छा सोचें।

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