How to Practice Kriya Yoga at Home in Hindi and its 5 Important Types

आज हम आपको बताएँगे की How to Practice Kriya Yoga at Home in Hindi . आज के लेख में आपको सारी जानकारी बहुत ही डिटेल में समझे जाएगी . क्रिया योग एक तरह की अदृश्य शक्ति है जो हमारे मन को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने के दौरान हमारे आंतरिक शक्तियों को जागृत करती है .

Practice Kriya Yoga at Home
Practice Kriya Yoga at Home

क्रिया योग की सबसे बड़ी विशेषता यह है की यह आपके मन को भटकने से रोकता है . आपको अपने मन पर किसी प्रकार का कोई नियंत्रण पाने की जरुरत नहीं है .

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इसमें हमारे को मनमानी करने की पूर्णतः छूट मिली होती है . हमारे मन अपनी अलग दिशा में चलता है एवं हमारे मस्तिष्क को शांति प्रदान करने में सहायक होता है . ठीक जैसे हमारा मन शांति की मुद्रा में चला जाता है उसी समय साधक की क्रिया शुरू होती है . आपकी जानकारी के लिए बता दू की क्रिया योग के और भी कई सारे प्रकार है जिनके बारे में हमें ज्ञान होना अनिवार्य है .

क्रिया योग के अन्य प्रकार  – Type of kriya yoga & how to practice kriya yoga at home:-

इसमें कई प्रकार शामिल है जिनमे से कुछ मुख्य प्रकारो से हम आपको अवगत करवाएंगे

  1. आसान
  2. प्राणायाम
  3. मुद्रा
  4. बंध
  5. हठयोग

इसके अंदर जप आदि का भी अभ्यास कराया जाता है .

एक नजर से देखा जाये तो इसकी प्रैक्टिस बहुत ही ज्यादा कठिन मानी जा रही है भलेही इसकी साधना को आसान रूप से चित्रित किया जा रहा है .

साधारण भाषा में अगर कहा जाये तो क्रिया योग आसान , प्राणायाम , मुद्रा , बंध हठयोग तथा जप आदि का मिला हुआ एक स्वरूप है .

क्रिया योग कैसे करते है ? How to Practice Kriya Yoga at Home in Hindi:-

आप इस बात से भली भांति परिचित होंगे की आप इंटरनेट या किसी पुस्तक का सहारा लेकर आप क्रिया योग नहीं सिख सकते है . क्रिया योग का अभ्यास करने हेतु आपको सर्वप्रथम किसी योग गुरु या किसी को पाठशाला को join करना होगा तभी आप क्रिया योग ध्यान को पूरी तरह से कर पाएंगे एवं इसका सही से लाभ भी उठा पाएंगे .

How to Practice Kriya Yoga at Home in Hindi

यदि आप किसी पाठशाला को ज्वाइन करते है तो उसमे आपको सबसे पहले साल का अभ्यास आपको घर में रहकर ही करवाया जाता है . इसके अंदर आपको ध्यान की मुख्य तीन विधियों के बारे में बताया जाता है . और हम श्री परमहंश जी द्वारा बताये गए उपदेशो को अनुग्रहित करते है . जिसमे हम आध्यातिक जीवन से जुड़े कुछ तथ्य के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त करते है .

Important Points Related to Practice kriya yoga at home:-

उदाहरण के लिए आपको समझते है की यदि आप हिमालय पर्वत की उचाईयो पर चढ़ने की तैयारी कर रहे है तो आपको सर्वप्रथम हिमालय की ठंठी जलवायु के लिए अपने शरीर को तैयार करना होगा तभी आप आगे का सफर पार कर पाते है अन्यथा आपको इसमें कोई सफलता प्राप्त नहीं होती है. ठीक वैसे ही क्रिया योग भी है इसमें भी आपको पहले ध्यान के प्राथमिक योग के बारे जानना अनिवार्य हो जाता है .

इसलिए साधक को अपने शरीर की क्रियाओ , आदतों , मानशिक स्थितियों , भक्तिभाव एवं एकाग्रता को योग के अनुरूप बनाना अनिवार्य हो जाता है . और ऐसा तभी संभव है जब हम अपने जीवन की प्राण ऊर्जा को योग के अनुरूप बना ले .

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जब आप अपने को क्रिया योग के लिए पूरी तरह से तैयार कर लेते है तब आपको मेरुदंड के रस्ते पर निकलना होता है जिसमे आपको उन्नत अवस्ता प्राप्त करनी होती है . एक साल के कठोर परिश्र्म के उपरांत योगी क्रिया योग के लिए पूर्णतः तैयार हो जाता है . एवं योगी क्रिया योग की सभी विधियों को अच्छे से समझ पायेगा एवं उसका सही लाभ भी प्राप्त होगा . गुरु शिष्य सम्बन्ध भी अच्छा हो जाता है जिसके चलते उनमे आपसी प्रेम भाव हमें देखने को मिल जाता है .

आध्यात्मिक क्रिया क्या है ?

जैसा की हम जानते है हमारे संसार का यह नियम होता है की जिसका जन्म हुआ है उसकी मृत्यु भी निश्चित है यह नियति का नियम है हर कोई इस सांसारिक मोहमाया से दूर होगा एवं मुक्ति प्राप्त भी होगी .  आध्यात्मिकता के द्वारा हम अपनी आत्मा को मुक्ति दिला सकते है .

आध्यात्मिक शक्ति जिस व्यक्ति के पास होती है वह ऐश्वर्य गुणों से भरपूर होता है एवं यह ऐसी दिशा है जिसमे हमें ईस्वर की प्राप्ति होती है . एवं हम जैसा भी कर्म करेंगे उसके अनुसार हमें फल अवश्य मिलेगा यदि हम बुरे कर्म करेंगे तो हमें बुरे परिणाम के लिए भी तैयार रहना चाहिए . इसलिए आध्यातिक्ता ही वह सीठी है जिसके अनुरूप चलकर ईस्वर की प्राप्ति की जा सकती है .

FAQ Related to ‘Practice kriya yoga at home

आध्यात्मिक विकास से मनुष्य को क्या मिलता है?

इसका उद्देश्य यह होता है की जो ज्ञान एवं अच्छाई व्यक्ति के अंदर जन्म से ही होती है उसी अच्छाई के रस्ते पर चलकर व्यक्ति आध्यात्मिकता एवं सहजता की प्राप्ति करता है जो ऐश्वर्य मिलन के लिए बहुत उपयोगी मानी जाती है . practice kriya yoga at home यह हमारे एवं ईस्वर प्रेम को बढ़ाने का कार्य करती है जिससे ईस्वर संतुस्ट होता है .

क्रिया योग के तीन सोपान कौन से हैं?

पतंजलि के अनुचार इसके आठ अंग बताये गए है . परन्तु इसके कुछ मुख्य अंग सोपान है जो है आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि आदि

योग क्रियाओं का अनुसरण करने से हमें क्या लाभ है?

हमारे शरीर को सकारात्मक उर्जाओ की प्राप्ति होने के साथ साथ हमें मानशिक संतुष्टि भी मिलती है एवं हमारे मानशिक रोगो जैसे तनाव , अनिद्रा , अनेकाग्रता आदि समस्याओ से भी हमें काफी रहत मिलती है .

Final words for ‘Practice Kriya Yoga at Home’

क्रिया योग शारीरिक एवं मानशिक दोनों तरह से हमारे लिए फायदेमंद है इसलिए क्रिया योग को अपनाना हमारे लिए बहुत अनिवार्य है practice kriya yoga at home  यह हमारे मन को शांति प्रदान करने में भी काफी सहायक है तथा विभिन्न प्रकार के रोगो के निवारण के साथी ही हमें आध्यात्मिक शक्ति का भी अनुभव करवाती है .

इसलिए हमें इसके पहलु को ध्यान से फरखना चाहिए एवं जहा तक संभव हो योग को अपने जीवन में जरूर उतारे क्युकी योग की वह शक्ति है जो आपको हर तरह से सुरक्षा देता है . योग के अंदर अनेक तरह के गन मौजूद होते है जो हमें काफी सहायता देते है . how to practice kriya yoga meditationइसलिए हमें इसके पहलु को ध्यान से फरखना चाहिए एवं जहा तक संभव हो योग को अपने जीवन में जरूर उतारे क्युकी योग की वह शक्ति है जो आपको हर तरह से सुरक्षा देता है . योग के अंदर अनेक तरह के गन मौजूद होते है जो हमें काफी सहायता देते है . 

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