Bada Balidan kiska Vikram Betal Hindi Kahani : Vikram Betal 1 Interesting Story

Bada Balidan kiska Vikram Betal Hindi Kahani : हम सभी जानते हैं कि Vikram Betal की कहानियां दिलचस्प इसलिए होती है क्योंकि हर बार Betal Vikram को एक कहानी सुनाता है और Vikram जैसे ही बोल पड़ता है Betal उसकी कमर से उतर के पेड़ पर चला जाता है । वह भिक्षु को बेताल के पास ले जाने में असमर्थ हो जाता है तो इसी के बीच में एक कहानी सुनाता है विक्रम को Betal ।

Bada Balidan kiska Vikram Betal Hindi Kahani


वह कहानी है राजा रूप से और अंगरक्षक वीरवर की तो कहानी कुछ इस प्रकार है कि वर्तमान राज्य में एक राजा राज्य करते थे जिनका नाम रूप से इन था वह अपने पराक्रम के लिए और राज्यों में जाने जाते थे वह विक्रमादित्य की तरह ही साहसी और दयालु थे । उनके पराक्रम के चर्चे पूरे दूर-दूर तक अलग-अलग राज्यों में फैले हुए थे और रूप से इन के दरबार में एक बार वीरवार नाम का एक व्यक्ति आता है

और राजा ने जब पूछ पूछा वीरवर से कि तुम यहां क्यों आए हो। तो राजा से वीरवर कहता है कि मैं यहां पर आपके पास में नौकरी मांगने आया हूं। मुझे आप अपनी सेवा का मौका दीजिए मैं आपका अंगरक्षक बनना चाहता हूं । राजा को यह बात पहले तो पची नहीं पर राजा ने बीरबल से कहा कि मैं तुम्हें अपना अंगरक्षक बना तो सकता हूं। पर मैं कैसे मान लूं कि तुम्हारी कार्यकुशलता ठीक है इसके लिए तुम्हें अपनी कार्यकुशलता सिद्ध करनी होगी ताकि मैं इस बात पर आ सकूं कि तुम मेरे अंगरक्षक बनने के लायक भी हो या नहीं ।

राजा की यह बात सुनकर वीरवर फौरन तैयार हो गया और वह अपने बाहुबल को प्रस्तुत करने के लिए तैयार हो गया वीरवर ने राजा के समक्ष सारी विशेषताएं रखी और वह इतनी प्रभावशाली थी कि राजा भी बहुत प्रभावित हुए राजा ने पूछा कि यदि मैं तुम्हें अपना अंगरक्षक रखता हूं तो तुम्हें प्रतिदिन का कितना खर्चा है।

राजा के सवाल पर वीरवर ने कहा कि मुझे आप हजार तोले सोना दे देना और वीरवर की इस बात को सुनकर वहां मौजूद दरबार में सारे लोग चौक गए कि वीरवर ने आखिर क्यों इतनी बड़ी रकम राजा से मांगी राजा ने इस मांग के बाद बीरबल से पूछा कि तुम्हारे परिवार में कितने लोग हैं वीरवर बने इस बात का उत्तर दिया कि हमारे परिवार में कुल 4 लोग हैं महाराज मैं मेरी पत्नी एक बेटा और एक बेटी।


वीरवर के इस सवाल के जवाब पर राजा ने मन ही मन सोचा कि 4 जनों के भरण-पोषण के लिए इतनी भारी रकम की आवश्यकता क्या है फिर यह सोचकर वीरवार को हजार तोले सोना प्रतिदिन देने का राजा ने निश्चय भी कर लिया एक बार को काम सिर्फ इतना था कि उसे हर रात राजा की सुरक्षा के लिए उसके कक्ष के बाहर पहरा देना होता था।

राजा यह जानना चाहता था कि सबसे पहले कि वीरवार को इतना धन क्यों चाहिए था और उसने वीरवर को हजार तोला सोना देकर रात में नौकरी पर आने को कह दिया और गुप्त रूप से कुछ सैनिकों से कहा कि उसके पीछे जाओ और पता लगाओ कि इस को मनचाहा वेतन क्यों चाहिए था वीरवार सोना लेकर खुशी खुशी कर गया।


और आधा सोना ब्राह्मणों में बैठने के बाद वीरवार को बड़ी खुशी हुई बाकी जो उसके पास में आधा हिस्सा बचा था ।
उसने उसके दो हिस्से की है एक हिस्सा वैराग्य सन्यासियों और मेहमानों को दिया और दूसरा हिस्सा उससे उसने अनाज मंगवाया और बढ़िया पकवान बनाया ।उसके पश्चात वीरवर ने उन पकवानों को गरीबों में बटवा दिया और जो भी बचा वह परिवार के साथ में उसने मिल बांट कर खाया वीर की निगरानी कर रहे सैनिकों ने सहारा नजारा देखा।


और जैसे ही यह नजारा देखा वह भी बड़े खुश हुए और उन्होंने सारा का सारा नजारा राजा को सुनाया और उन्हें बताया कि राजा आप संतोष में रहिए वीरवर आपके धन को अच्छे काम में लगा रहा है राजा को भी संतोष हुआ और राजा को अब यह देखना था कि मैं अपने काम में कितना खरा उतरता है। एक रात की बात है जब राजा के कक्ष के बाल वीर बने पहरा देना शुरू किया तो राजा ने उस रात निद्रा नहीं ली वह जागे हुए थे और उन्होंने यही देखा कि वीरवार कितनी निष्ठा के साथ अपने कार्य को करता है ।


और राजा यह देखकर हैरान हो गए कि वीरवार पूरी मुस्तैदी से बिना पलक झपकाए उनके कक्ष के बाहर खड़ा हुआ था और उनकी सुरक्षा कर रहा था राजा यह देखकर बड़े खुश हुए और उन्होंने मन में यह सोचा कि उन्होंने सही इंसान को चुना है।
एक बार की बात है राजा सोए हुए थे और वीरवर भी अपनी मुस्तैदी से खड़े हुए थे राजा के कक्ष के बाद तभी उन्हें एक स्त्री के रोने की आवाज आती है ।


जब उसके पास पहुंचते हैं तो वह देखते हैं कि एक स्त्री जो ऊपर से नीचे तक सोने से लगी हुई है तब वीरवर ने उनसे पूछा कि आप रो क्यों नहीं है तब वह बताते हैं कि मैं राजलक्ष्मी हूं और मैं इसलिए रो रही हूं क्योंकि राजा की मृत्यु होने वाली है।
और राजा की मृत्यु के बाद मुझे किसी और के पास में रहना होगा और मैं इसी चीज से परेशान हूं ।


वीरवर पूछते हैं कि क्या आप मुझे बताएंगे इसका उपाय क्या है तो राजा की जान बचाने के लिए देवी बताती हैं कि पूर्व में एक देवी का मंदिर है वहां पर यदि तुम अपने बेटे की बलि चढ़ा दोगे तो तुम्हारे राजा की आयु 100 वर्ष तक बढ़ जाएगी । इस बात पर निर्भर कहते हैं कि ठीक है और वह यह कह कर अपने घर की ओर चल देते हैं यह सारे व्यथा अपनी पत्नी को बताते हैं ।

तो उनके बच्चे भी जाते हैं उनका बेटा कहता है कि मेरे लिए बड़ी सौभाग्य की बात क्या होगी कि मैं अपने पिता के काम आ सकूं और मां के चरणों में मृत्यु उससे बड़ी बात और क्या हो सकती है । वह राजी हो जाते हैं और मंदिर जाकर वीरवर अपने पुत्र की बलि चढ़ा देता है यह देख उसकी पुत्री भी सर पटक पटक कर मर जाती है ।

और अपने दोनों बच्चों को भी जान दे देते हैं जब वो अपनी मृत्यु को पा लेते हैं उसके बाद भी सोचता है कि मैं भी अब जी के किसी के बाद वीरवर भी तलवार उठाता है और अपनी गर्दन धड़ से अलग कर देता है।


जब राजा को इस बात का पता चलता है तो राजा भी बहुत दुखी होते हैं और वह मंदिर पहुंचते हैं और जैसे ही वह इस दुख में अपने आप को मृत्यु के घाट उतारने वाले होते हैं । तभी देवी प्रकट होते हैं और देवी कहती हैं कि मांगो राजा तुम क्या वरदान मांगते हो मैं तुमसे बहुत प्रसन्न हूं ।देवी से राजा बोलते हैं कि मैं आपसे यह वरदान मांगता हूं कि आप वीरवर और उसके परिवार को वापस से जिंदा कर दीजिए और ऐसा ही होता है देवी फिर से राजा के कहने पर बीरबल और उसके परिवार को जिंदा कर देते हैं ।

अब बेताल पूछता है कि बताओ विक्रम सबसे बड़ा बलिदान किसका इस बात पर विक्रम जवाब देते हुए कहते हैं कि सबसे बड़ा बलिदान राजा का होता है Betal पूछते हैं । वह कैसे तो विक्रम कहते हैं कि एक सेवक का काम होता है अपने राजा की बात मानना एक पुत्र का काम होता है अपने पिता की बात मानना बहुत बड़ा बलिदान होता है। अपने सेवक के लिए अपनी जान दे देना तो इसीलिए सबसे बड़ा बलिदान हुआ राजा का बेताल कहते हैं ।

बिल्कुल सही कहा तुमने बिलकुल सही जवाब पर तुम यह बात भूल गए कि मैंने तुमसे कहा था कि यदि तुम बोलोगे तो मैं फिर से उड़ जाऊंगा और यह कहकर बेताल फिर से पेड़ पर चढ़ जाता है ।

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FAQ Related To Bada Balidan kiska Vikram Betal Hindi Kahani

Is Vikram Betal story real ?( क्या विक्रम Betal की कहानी सच्ची हैं?)

विक्रम Betal की कहानी कश्मीरी लेखक सोमदेव भट्ट ने लिखी है और यह विक्रमादित्य जो कि उज्जैन के राजा होते थे उनके बारे में है।

Final Words For Bada Balidan kiska Vikram Betal Hindi Kahani

इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें अपने काम को हमेशा पूरी निष्ठा के साथ करना चाहिए और हमें इस बात का भी ध्यान देना चाहिए कि यदि हम अपने राजा या फिर अपने मालिक के प्रति अपनी निष्ठा को दिखाते हैं तो हमें कभी भी बुरा नहीं देखना पड़ता।

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