Sacha purusharth Swami Vivekananda Ki Hindi Kahani

Sacha purusharth Swami Vivekananda Ki Hindi Kahani : बहुत बार आपने बहुत लोगों को पुरुषार्थ की परिभाषा देते हुए सुना होगा बहुत लोग इसे अपने अपने हिसाब से कहते हैं और अपने अपने हिसाब से ही इसे बताते हैं । पर क्या आप जानते हैं कि सच्चा पुरुषार्थ क्या होता है एक सच्चे पुरुष की क्वालिटीज क्या होते हैं ।

Sacha purusharth Swami Vivekananda Ki Hindi Kahani

Swami Vivekananda एक ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने सच्चे पुरुषार्थ की परिभाषा दी और ऐसा इसलिए कहना संभव है क्योंकि उनके जीवन से जुड़े कुछ एक बेहतरीन किस्सों में से एक किस्सा जो कि हम इस कहानी के माध्यम से आप लोगों तक लेकर आए हैं। वह बताता है कि वह कितने उच्च विचारों वाले व्यक्ति थे और क्यों हमें सच्चा पुरुषार्थ उन्हीं से सीखना चाहिए ।

Swami Vivekananda एक ऐसे व्यक्ति थे जो कि ना सिर्फ औरतों की इज्जत करते थे बल्कि उनसे हमें यह भी सीखना चाहिए कि प्रत्येक व्यक्ति की आपको किस तरह से इज्जत करनी चाहिए । यदि वह महिलाएं हो तो आप का दायित्व और बढ़ जाता है। स्वामी विवेकानंद के जीवन से जुड़ा हुआ एक किस्सा ऐसा ही है जिसमें उन्होंने यह साबित कर दिया कि वह एक सच्चे और बेहतरीन पुरुषार्थ को धारण करने वाले व्यक्ति थे ।

उनसे हमें यह सारी चीजें सीखना तो बनता है बिना किसी देरी के इस कहानी को आगे बढ़ाते हैं और आपको बताते हैं कि वह कौन सा किस्सा है जो Swami Vivekananda के बारे में बताता है कि वह एक सच्चे पुरुषार्थ वाले व्यक्ति थे।

स्वामी विवेकानंद के बारे में हम सभी जानते हैं कि शिकागो धर्म सम्मेलन में उनके भाषण में ऐसा चमत्कार और जादू किया था लोगों के मन पर । कि सब जगह उनकी वाह वाही हो रही थी । ना सिर्फ हमारे देश में स्वामी विवेकानंद के चर्चे थे बल्कि विदेशों में भी स्वामी विवेकानंद के चर्चे हो रहे थे। Swami Vivekananda के व्यक्तित्व के बारे में लोग बातें कर रहे थे उनके व्यक्तित्व जैसा अपना व्यक्तित्व बनाना चाह रहे थे । और उसी के साथ साथ Swami Vivekananda से लोग इतने प्रभावित थे ।

कि एक बार की बात है जब स्वामी विवेकानंद अपने देश लौट आए थे तब उनसे मिलने एक विदेशी महिला पहुंची । विदेशी महिला Swami Vivekananda के चरित्र से इतनी ज्यादा प्रभावित थी कि वह उनसे विवाह करना चाहती थी । विदेशी महिला जब स्वामी विवेकानंद से मिलने पहुंची तो वह बिना डरे Swami Vivekananda के पास पहुंच गई और बिना डरे उसने यह कहा कि मुझे आपसे विवाह करना है । स्वामी विवेकानंद ने यह बात सुनकर ना तो कोई आक्रोश दिखाया ना कोई तरह का उत्तर दिया ।

वह शालीनता के साथ बैठे रहे उन्होंने विदेशी महिला को बैठने को कहा उनके लिए पानी मंगाया और उनसे उत्तर मांगा। अपने सवाल का । सवाल था यह कि आप पूरे विश्व में अपने देश को छोड़कर आए हैं अपने आसपास के लोगों को छोड़कर आए हैं और हमारे ही देश में और इतने सारे लोगों में आप सिर्फ और सिर्फ मुझसे ही क्यों विवाह करना चाहती हैं?


Swami Vivekananda के इस सवाल पर वह विदेशी महिला ने उत्तर दिया कि मैं आपसे विवाह इसलिए करना चाहती हूं क्योंकि मुझे आपकी बातें बहुत पसंद आई और आपका चरित्र बहुत पसंद आया और मुझे आपसे विवाह करना है क्योंकि मैं चाहती हूं कि मेरा पुत्र जो भी हो वह आपके जैसा ही हो ।


आपके चरित्र को रखने वाला ही हो आपकी जैसी ही उसकी सोच हो और वह सच्चे पुरुषार्थ की परिभाषा बने। स्वामी विवेकानंद ने उस विदेशी महिला की बात सुनी और उन्होंने बहुत शालीनता के साथ उत्तर देते हुए कहा कि देखिए मैं आपसे विवाह नहीं कर सकता क्योंकि मैं एक सन्यासी हूं। पर मैं आपकी दूसरी इच्छा पूरी जरूर कर सकता हूं विदेशी महिला को इस बात पर कुछ समझ नहीं आया कि वह कौन सी इच्छा के बारे में बात कर रहे हैं ।

तो विदेशी महिला ने पूछा कि वह कैसे और वह कौन सी इच्छा है जो आप पूरी कर सकते हैं स्वामी विवेकानंद ने उत्तर दिया कि मैं आपकी वह अच्छा पूरी कर सकता हूं कि आपका पुत्र मेरे जैसा ही हो क्योंकि आप मुझे अगर अपना पुत्र बना लें तो ।इससे आपकी यह इच्छा भी पूरी हो जाएगी ।

कि आपको पुत्र मेरे जैसा हो और आपको पुत्र भी मिल जाएगा स्वामी विवेकानंद की बात सुनकर विदेशी महिला उनके सामने नतमस्तक हो गई और विदेशी महिला ने स्वामी विवेकानंद से कहा कि आज आपकी इज्जत मेरे मन में और बढ़ गई क्योंकि मैंने आपके जैसा पुरुषार्थ रखने वाला पुरुष आज तक नहीं देखा और आपके जैसा व्यक्ति इस दुनिया में होना असंभव है स्वामी विवेकानंद को उन्होंने नमस्कार किया और वह वहां से चली गई।

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What was the hobbies of Swami Vivekananda?( स्वामी विवेकानंद को क्या करना पसंद था?)

स्वामी विवेकानंद को किताबें पढ़ना बहुत ज्यादा पसंद था।

Final Words For Sacha purusharth Swami Vivekananda Ki Hindi Kahani

इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें हमेशा महिलाओं की इज्जत करनी चाहिए और हमें हर किसी स्थिति में सबसे पहले तो उन बातों के बारे में सोचना चाहिए जो कि हमारे चरित्र को बतलाती है और इसी की वजह से हमें इस चीज का भी ध्यान देना चाहिए कि महिलाओं की इज्जत करते हुए हमें यह भी ध्यान देना चाहिए कि सच्चे पुरुष की क्या जिम्मेदारी बनती है और क्या दायित्व बनता है स्वामी विवेकानंद से हमें यह सीखने को मिलता है कि सच्चे पुरुषार्थ और सच्चे पुरुष की परिभाषा क्या होती है।

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