Satya Ka Sath Swami Vivekananda Ki Hindi Kahani

Satya Ka Sath Swami Vivekananda Ki Hindi Kahani : आज के कहानी संग्रह में हम आप लोगों के लिए लेकर आए हैं Swami Vivekananda की प्रेरणादायक कहानी में से एक कहानी जिसका नाम है सत्य का साथ। हम सभी जानते हैं कि Swami Vivekananda बचपन से ही बुद्धिमान और बहुत ही प्रभावशाली व्यक्ति रहे हैं और उनकी इसी प्रभावशाली व्यक्तित्व से हम अपने जीवन में काफी कुछ सीख सकते हैं ।

Satya Ka Sath Swami Vivekananda Ki Hindi Kahani

तो आज के इस कहानी संग्रह में हम आप लोगों को उन्हीं के व्यक्तित्व के बारे में कुछ दिलचस्प तथ्यों के बारे में बताएंगे । आप लोगों से इस बात का भी आग्रह करेंगे कि आप इस कहानी को अच्छे से पढ़े और इस से सीखे जो अपने जीवन में उतार सकते हैं और सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं ।

आप लोगों के लिए कहानी काफी ज्यादा सकारात्मक साबित हो सकती है क्योंकि इसमें हमारे जीवन में एक महत्वपूर्ण सीखने वाली बात छिपी हुई है तो चलिए बिना किसी देरी के हम आप लोगों को सुनाते हैं यह कहानी। हम सभी जानते हैं कि स्वामी विवेकानंद बचपन से ही बहुत होनहार छात्र रहे हैं ।वह बचपन से ही बहुत बुद्धिमान और प्रतिभाशाली छात्र रहे हैं और इसका हमें बहुत बार उन्होंने अपनी बातों से और अपनी सोच से परिचय दिया है ।

तो यह बात उस वक्त की है जब गौतम बुद्ध विद्यालय में पढ़ते थे। एक बार की बात है वह अपने दोस्तों को एक प्रतिभाशाली कहानी सुना रहे थे और उन्होंने अपने जीवन में बहुत कुछ सकारात्मक किया है । उनके बात करने का और कहानी सुनाने का तरीका इतना ज्यादा प्रभावशाली था कि वह उनके दोस्त उनकी बातों में इतना खो गए कि उन्हें पता ही नहीं चला कि कब मास्टरजी कक्षा में आ गए थे।

मास्टर जी ने कक्षा में आकर पढ़ाना शुरू कर दिया था पर Swami Vivekananda और उनके मित्रों का सारा ध्यान कहानी में ही था मास्टरजी पढ़ाते पढ़ाते बीच में स्वामी विवेकानंद की आवाज को सुन रहे थे और जब उनसे रहा नहीं गया । तो उन्होंने कक्षा में चिल्लाते हुए बोला की है आवाज किसकी है कौन कक्षा के अंदर बातें कर रहा है मास्टर जी के इस सवाल में कक्षा में अन्य छात्रों ने Swami Vivekananda और उनके मित्रों की तरफ इशारा कर दिया।

मास्टर जी ने सभी को खड़ा किया और बारी-बारी उनसे वह प्रश्न किया जो मास्टर जी कक्षा में उस वक्त पढ़ा रहे थे। किसी पर किसी प्रकार का जवाब नहीं बना और सब ने गलत उत्तर दिया फिर मास्टर जी स्वामी विवेकानंद की तरफ पहुंचे । उन्होंने सवाल पूछा Swami Vivekananda से Swami Vivekananda ने बिल्कुल सही उत्तर दिया और मास्टर जी को ऐसा लगा कि स्वामी विवेकानंद अकेले ही पढ़ रहे थे।

उनके सारे मित्र बाकी बातें कर रहे थे मास्टर जी को उन बच्चों पर बहुत ज्यादा गुस्सा आया और उन्होंने पहले तो उन बच्चों को बहुत ज्यादा डाटा और उसके बाद उन बच्चों को सजा सुना दी कि जाकर पीछे अपनी अपनी बेंच पर खड़े हो जाओ और हाथ ऊपर कर लो । मास्टर जी ने Swami Vivekananda से उनकी बेंच पर जाकर बैठने को कहा और उनसे कहा कि वापस पढ़ाई में मन लगाएं । जैसे-जैसे एक-एक करके बच्चे अपनी बेंच पर सजा काटने के लिए खड़े हो रहे थे।

Swami Vivekananda उनकी ओर देख रहे थे Swami Vivekananda से रहा नहीं गया और वह भी पीछे गए और अपनी बेंच पर जाकर खड़े हो गए । मास्टर जी ने Swami Vivekananda से कहा कि मैंने तुमको सजा नहीं दी तुम क्यों फिर अपनी बेंच पर खड़े हो गए हो ? इस पर Swami Vivekananda ने जवाब देते हुए कहा कि शमा कीजिए मास्टर जी मैंने ही इन लोगों को अपनी बातों में लगा रखा था । मैं ही इन्हें दरअसल कहानी सुना रहा था यह बेचारे तो सिर्फ मेरी कहानी पर ही ध्यान लगाए हुए उसे सुन रहे थे ।

मास्टर जी को स्वामी विवेकानंद की सच्चाई इतनी प्रभावित कि उन्होंने स्वामी विवेकानंद को शाबाशी देते हुए पूरी कक्षा को यह बताया कि हमें हमेशा सच्चाई का साथ देना चाहिए । चाहे उसकी वजह से हमें सजा ही क्यों ना मिले हमें हमेशा हमारी गलतियों को मान लेना चाहिए । यदि हमें किसी तरह से गलत रास्ते पर जाने का मन भी हो तो हम उस से नकारते हुए सच का यदि साथ देते हैं तभी हम जीवन में अच्छे इंसान बन पाते हैं स्वामी विवेकानंद शायद इसीलिए प्रभावशाली थे इतने क्योंकि वह हमेशा सत्य का ही साथ दिया करते थे।

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FAQ Related To Satya Ka Sath Swami Vivekananda Ki Hindi Kahani

When was Swami Vivekananda Born ?( स्वामी विवेकानंद का जन्म कब हुआ था?)

स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी 1863 को हुआ था ।

What was the actual name of Swami Vivekananda ? ( स्वामी विवेकानंद का वास्तविक नाम क्या था?)

स्वामी विवेकानंद का वास्तविक नाम नरेंद्र नाथ दत्ता था।

Final Words For Satya Ka Sath Swami Vivekananda Ki Hindi Kahani

इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें हमेशा सत्य का साथ देना चाहिए और हमें किसी भी तरह से झूठ को नहीं बढ़ावा देना चाहिए यदि हमारी गलती है तो हमें उसे स्वीकार कर लेना चाहिए चाहे वह किसी की पकड़ में आए या ना आए हमें हमेशा सत्य का साथ देते हुए अपनी कमियों को पकड़ना चाहिए और इसी की वजह से आप अपने जीवन में आगे बढ़ सकते हैं

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