50 amazing Life-Changing Stories: Apni Bhasha Par Garv Swami Vivekananda Hindi Kahani

Apni Bhasha Par Garv Swami Vivekananda Hindi Kahani : हम सभी जानते हैं कि स्वामी विवेकानंद एक ऐसी शख्सियत हैं जिनके बारे में शायद पूरा विश्वास भी उनके जीवन की सार्थकता को समझता है और यदि हम बात करें स्वामी विवेकानंद के जीवन परिचय की तो इस बात की आवश्यकता हमें नहीं है कि हमें उम्मीद के जीवन का परिचय देना पड़े स्वामी विवेकानंद अपने आप में ही एक ऐसी शख्सियत थे जिन्होंने पूरे विश्व भर में अपने भारत देश का नाम रोशन किया उसी के साथ साथ आज तक वह बहुत सारे लोगों के जीवन की प्रेरणा बने हुए हैं

Apni Bhasha Par Garv Swami Vivekananda Hindi Kahani

Apni Bhasha Par Garv Swami Vivekananda Hindi Kahani : आज भी इतने सालों बाद लोग स्वामी विवेकानंद की बातों को फॉलो करते हैं और उसी के साथ-साथ अपने जीवन को बदलने में काफी सहायक साबित करते हैं उनकी कही हुई विचारधाराएं तो आज इस कहानी संग्रह में हम आप लोगों के लिए एक ऐसी कहानी लेकर आए हैं जिससे आप अपने जीवन को पूरी तरह से बदल सकते हैं आज हम आप लोगों को बताएंगे एक कहानी के बारे में जो कि हमें यह बताता है कि हमें अपने देश पर हमें अपनी भाषा पर गर्व होना चाहिए तो चलिए बिना किसी देरीे के कहानी की शुरुआत करते हैं।

Apni BhaApni Bhasha Par Garv Swami Vivekananda Hindi Kahani : तो बात उस वक्त की है जो स्वामी विवेकानंद विदेश यात्रा पर थे हम सब जानते हैं कि स्वामी विवेकानंद ने अपने जीवन काल में बहुत सारी विदेशी यात्रा की है और पूरे विदेशों में पूरे विश्व में हमारे देश का नाम ऊंचा किया है तो बार की बात है जब स्वामी विवेकानंद विदेश यात्रा पर थे और वहां पर अंग्रेज जब उनसे मिलते तो स्वामी विवेकानंद उनका जवाब हाथ जोड़कर नमस्कार के साथ देते हैं।

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Apni Bhasha Par Garv Swami Vivekananda Hindi Kahani : इस बात पर वहां पर लोगों को यह लगा कि स्वामी विवेकानंद को शायद अंग्रेजी भाषा नहीं आती स्वामी विवेकानंद भी मुस्कुरा कर इस बात को समझ रहे थे क्योंकि जब भी कोई अंग्रेज उनसे हाय हेलो कहता विवेकानंद सिर झुकाकर नमस्ते कहते क्योंकि हमारी संस्कृति में जैसा कि हम सब जानते हैं कि

हम किसी भी व्यक्ति को आदर सम्मान के साथ देखते हैं तो हम उनसे झुककर नमस्ते करते हैं और स्वामी विवेकानंद भी अपनी संस्कृति को आगे बढ़ाते हुए अपनी भाषा का आदर करते हुए ऐसा ही कर रहे थे

Apni Bhasha Par Garv Swami Vivekananda Hindi Kahani : और अंग्रेजों को इस बात का घमंड हुआ कि शायद स्वामी विवेकानंद अंग्रेजी भाषा नहीं जानते और वह इसी लिए ही टाला मटोली करते हुए हिंदी में जवाब दे रहे हैं तो उस सारे लोगों की भीड़ में से एक आदमी ने स्वामी विवेकानंद से हिंदी में एक सवाल किया और वह सवाल ताकि स्वामी जी आप कैसे हैं इस पर स्वामी जी ने मुस्कुराकर अंग्रेजी भाषा में जवाब दिया कि “आई एम फाइन थैंक यू” यह सुनकर स्वामी जी ने

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अंग्रेजी भाषा में जवाब दिया तो उन सब का यह भ्रम टूट गया कि अंग्रेजी भाषा ना आने की वजह से यह चुप नहीं थे बल्कि इसका कारण कुछ और ही था

Apni Bhasha Par Garv Swami Vivekananda Hindi Kahani : आपस में लोग खुश और प्रसन्न करने लगे और उन लोगों ने यह चीज जान ली थी कि भाई हमें किसी का अनादर नहीं करना चाहिए भाषा की वजह से इसी बीच उन लोगों में से एक व्यक्ति ने सवाल पूछ ही लिया कि जब हमने आपसे अंग्रेजी में भाषा में बात की तो आपने हमें हिंदी में जवाब दिया और जिस वक्त हमने आपसे हिंदी में बात की आपने हमें अंग्रेजी में जवाब दिया इस सवाल पर स्वामी जी मुस्कुराए और उन्होंने बड़े आदर सम्मान से विनम्रता पूर्वक कहा कि जब आप मुझसे अपनी मातृभाषा का आदर करते हुए अंग्रेजी में बात कर रहे थे

Apni Bhasha Par Garv Swami Vivekananda Hindi Kahani : तब मैंने भी अपनी भारत मां की भाषा हिंदी में उत्तर देने का प्रयत्न किया इस बात को सुनकर सब इतने भोंचक्के हो गए और स्वामी जी की वाह वाही इसी की वजह से और हो गई क्योंकि उनके देश प्रेम को और अपनी संस्कृति के प्रति प्रेम को देखकर उनसे और ज्यादा प्रभावित हुए और इसी प्रभावशाली व्यक्तित्व की वजह से आज हम सब जानते हैं कि स्वामी विवेकानंद एक ऐसा नाम है जिसके बारे में शायद ही

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हमें आप लोगों को बताने की जरूरत हो तो इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें अपने देश के प्रति आदर भाव को हमेशा रखना चाहिए अपनी भाषा के प्रति आदर भाव हमेशा रखना चाहिए और अपने देश प्रेम को दिल में लेकर ही आगे बढ़ना चाहिए।

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यदि हम बात करें इस कहानी से मिलने वाली शिक्षा की तो इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें कभी भी किसी भी वक्त में किसी भी जगह पर अपने देश प्रेम को नहीं छोड़ना चाहिए क्योंकि जिस मातृभूमि ने हमें पाला है उस मातृभूमि का आदर सम्मान हमें हमेशा करना चाहिए और अपनी मातृभाषा में बात करने में कभी भी हम हिचकिचाहट नहीं होनी चाहिए

क्योंकि यही हमारी पहचान है और यदि हम इसमें हम कतराते हैं तो कहीं ना कहीं हम अपने आदर भाव को भूल जाते हैं और जो कि बिल्कुल भी हमें नहीं करना चाहिए।

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