50 amazing Life Changing Stories : Anghuti Chor Hindi Kahani

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Anghuti Chor Hindi Kahani : तो आज की इस कहानी संग्रह में हम आप लोगों के लिए एक बहुत ही दिलचस्प कहानी लेकर आए हैं जिसमें तेनाली रमन की बुद्धिमानी के बारे में हम बात करेंगे और बताएंगे कि कैसे आप भी अपनी बुद्धिमानी का इस्तेमाल करके आसानी से किसी भी बड़ी से बड़ी विपदा का सामना कर सकते हैं और किसी भी तरह की कठिनाइयों से आप बाहर आ सकते हैं उसका हल निकाल सकते हैं तो इस कहानी में भी राजा कृष्णदेव

Anghuti Chor Hindi Kahani

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और तेनाली रमन की ही चर्चा होगी तो चलिए बिना किसी देरी के आपको यह दिलचस्प कहानी सुनाते हैं और आपको बताते हैं कि कैसे तेनाली रमन ने राजा कृष्णदेव की अंगूठी के चोर को चुटकियों में पकड़ लिया।
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यह बात उस समय की है जब राजा कृष्णदेव विजयनगर के राजा थे और उनके सबसे विश्वासपात्र मंत्री थे तेनाली रामा हम सभी जानते हैं कि तेनाली रामा और राजा कृष्णदेव की बहुत अच्छी सहज भुज हुआ करती थी और तेनाली रमन राजा से बहुत खुश थे और राजा तेनाली रमन से बहुत खुश थे एक बार की बात है जब राजा अपने कक्ष से बाहर आ रहे थे तो वह अपनी अंगूठी ढूंढ रहे थे जो अंगूठी उन्हें बहुत ज्यादा कीमती लगती थी और वह उन्हें बहुत सुंदर लगती थी
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और राजा की प्रिय अंगूठियों में से एक अंगूठी थी राजा को आभूषण पहनने का बहुत शौक था वह नए नए हीरे जवारात से जड़ी हुए चीजों को बनवाते रहते थे और दूसरों को भी दिखाते जब भी कोई व्यक्ति उनके आभूषणों की तारीफ करता तो राजा को इससे बेहद प्रसन्नता होती थी और वह अंगूठी सबसे अनमोल थी सबसे कीमती थी और इस बात को राजा को अंदेशा नहीं था कि वह किसने चुराई राजा ने इस बात को किसी को नहीं बताया और वह राजमहल जाते पर उनका चेहरा मुरझाया

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मुझे लगता था तेनाली ने दो-तीन दिन इस बात को देखा और अंत में जाकर राजा से पूछ ही लिया कि नहीं राजन आप क्यों उदास है राजा ने इस बात को बताते हुए कहा कि तेनाली रमन मेरी अंगूठी किसी ने चुरा ली है और मुझे समझ नहीं आ रहा है कि वह किसने चुराई क्योंकि मैं ना तो कहीं बाहर गया हूं ना कोई मेरे कक्ष में आया तो इस बात को सुनते ही तेनाली रमन समझ
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गए कि राजा के आस पास के ही किसी सैनिक नहीं अंगूठी चुराई है और राजा से तेनाली रमन ने आग्रह किया कि आप सारे सैनिकों को मंदिर जाने को कहिए और दुर्गा मां का जो मंदिर हमारे राज्य में है उसी पर आपको चोर पता चल जाएगा राजा को थोड़ा

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अजीब लगा और उन्होंने तेनाली रमन की बात मानते हुए सैनिकों को मंदिर जाने का तेनाली रामा के मंदिर में पहुंचे और उन्होंने यह बात सबको कहीं की दुर्गा मां के पैर छूने है आप सबको और दुर्गा मां रात को सपने में आकर राजा को बताएंगे कि वह चोरी किसने की एक-एक करके सारे सैनिक मंदिर के अंदर गए और मंदिर से वह बाहर आते गए राजा ने कहा कि अब चोर का पता कल सुबह तक चल ही जाएगा सबके रहे थे और मंदिर में सैनिकों के अंदर गए थे

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और उन्होंने पंडित के कान में कुछ कहा था अब उनका कारण पूछा राजा ने कहा कि चोर का पता चल चुका है इसी लाइन में खड़े हुए सैनिकों को बड़ा अचंभा हुआ कि तेनाली रमन ने कैसे उस चोर को पकड़ लिया तब देना लिया बताते हुए कहा कि मंदिर में सैनिकों के जाने से पहले मैंने पंडित जी से दुर्गा मां के पैरों में लगाने को कहा जब भी हमने एक एक सैनिक को भेजा है जब भी उनके पैर छू रहे थे

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तो उनके हाथ में इत्र की महक आ रही थी पर उस सातवें नंबर के सैनिक ने दुर्गा मां के पैर छुए ही नहीं क्योंकि उसके मन में चोर था कि यदि उसका नाम लेंगे तो इसी की वजह से वह चोर पकड़ा गया रानी से बड़े खुश हुए और उन्होंने तेनाली रमन को उपहार भी दिए।

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इस कहानी से हमें यह सीखने को मिलता है कि हमें कभी भी लालच में आकर चोरी नहीं करनी चाहिए क्योंकि यह हमारी जिंदगी को पूरी तरह से खराब कर देता है हमें किसी भी तरह का बुरा काम करने का यदि मन होता है तो हमें हमेशा अपने आप को सकारात्मकता की ओर धकेलना होता है और हमें सकारात्मक रहते हुए चोरी जैसी चीजों से दूर रहना चाहिए

यदि हम बात करें हमारे जीवन की तो हमारा जीवन इन सारे कर्मों पर ही होता है और दूसरी सीखा में यह मिलती है कि हम अपनी परेशानियों का चुटकी में समाधान निकाल सकते हैं यदि हम संयम से और बुद्धिमानी से अपने जीवन में काम करें तो।

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