How to do Bhramari Pranayama and Its Benefits in 9 Easy Steps

Bhramari Pranayama के बारे में अक्सर लोग चर्चा तो करते हैं पर उन्हें यह नहीं पता होता कि तो आज इस Article How To do Bhramari Pranayama and its Benefits in 9 easy Steps के माध्यम से हम आपको इस बारे में बताएंगे कि Bhramari Pranayama के फायदे क्या क्या है । इसको करना क्यों आवश्यक होता है और हम इसे कैसे आसानी से कर सकते हैं । हम इस बात की भी चर्चा करेंगें की किन-किन चीजों का ध्यान हमें रखना चाहिए इसको को करते हुए।

भ्रामरी प्राणायाम  (Bhramari Pranayama) शब्द का अर्थ है ”  मधुमक्खी” और जिस प्रकार मधुमक्खी के गुनगुनाने की आवाज आती है इस प्राणायाम को करने से भी इसी प्रकार गुनगुनाने की आवाज गूंजती है।  इसलिए इस प्राणायाम को  भ्रामरी प्राणायाम भी कहा जाता है। जब आप इस प्राणायाम को करते हैं तो मन मस्तिष्क को अद्भुत शांति प्राप्त होती है , और मन में उपस्थित सभी तरंगे शांत हो जाती हैं ।

अतार्किक चंचल मन स्थिर अवस्था में आ जाता है , जिसके कारण आप क्रोध चिंता निराशा आदि से राहत पाते हैं | यह एक ऐसा प्राणायाम है जिसे कहीं पर भी बैठ कर किया जा सकता है लेकिन खुले स्थान पर या शांत वातावरण में बैठकर करने पर इसका लाभ दोहरा मिलता है । जब भ्रामरी प्राणायाम (Bhramari Pranayama) करते हैं  तो ऐसा प्रतीत होता है जैसे हम संपूर्ण ब्रह्मांड को देखने में सक्षम है या ऐसा प्रतीत होता है कि संपूर्ण ब्रह्मांड हमारे अनुकूल होने लगता है।  

Bhramari Pranayama
Bhramari Pranayama

Why is it necessary to do Bhramari Pranayama?

भ्रमरी प्राणायाम करना क्यों आवश्यक है ?   

हमारे दैनिक जीवन में अनेकों समस्याओं के कारण तनाव रहता है ,मन में अशांति रहती है , अत्यधिक तनाव के कारण थकान का अनुभव होने लगता है , क्रोध भरने लगता है इन सभी के निवारण के लिए भ्रामरी प्राणायाम सबसे उचित होता है। तनाव रहने पर मस्तिष्क में   भ्रामरी प्राणायाम  से एक कंपन अनुभव होता है और मस्तिष्क में रक्त संचालन होने लगता है , जिसके कारण तनाव स्वयं ही कम होने लगता है और हमारा ध्यान एकाग्रता की ओर स्वयं चला जाता है तथा हमें एक शांत वातावरण की अनुभूति होती है ।

और अचेतन मन चेतन अवस्था में आकर आत्मा का परमात्मा से मिलन कराता है जब हम  भ्रामरी प्राणायाम  को करते हैं तो हमारे  आंख बंद हो जाते हैं , और कानों को भी बंद कर लिया जाता है | और पूर्ण गहराई से अंदर की ओर देखा जाता है ,खुद को महसूस करने की कोशिश की जाती है जिसके कारण संपूर्ण तनाव समाप्त होकर मानसिक शांति का अनुभव करने लगता है।

How to do Mari Pranayama?

भ्रामरी प्राणायाम  कैसे करें ?

1. सर्वप्रथम शांत वातावरण में बैठ जाएं ।

2.आंखें बंद कर लो कानों को अंगूठे से बंद कर बाकी चार उंगलियों को सिर पर रखें पहले उंगली माथे पर रखें तथा शेष तीन उंगलियों को आंख और नाक के मध्य में रखें ।

3. संपूर्ण शरीर को शिथिल कर ले ।

4.  भ्रमरी प्राणायाम के दौरान होठो़ को बंद रखें।

5.  दांतो की पंक्तियों को थोड़ा अलग रखें |

6. और एक लंबी गहरी श्वास अंदर की ओर ले,

7.  कुछ समय के लिए श्वास को रोककर और ओम का उच्चारण करते हुए मधुमक्खी की तरह गुनगुनाने की आवाज निकाले ।

8. इसके पश्चात धीरे-धीरे श्वास को बाहर छोड़ें ओंकार नाथ करते हुए ध्वनि को जितना ऊंचा रखा जा सके उचित होगा ।

9.  इस प्रक्रिया को 5 से 6 बार दोहराएं अभ्यास होने पर आप इसे अनेकों बार कर सकते हैं।           

How to do Bhramari Pranayama
How to do Bhramari Pranayama

Things to keep in mind during Bhramari Pranayama

भ्रामरी प्राणायाम  के समय ध्यान रखने योग्य बातें :-                                                                           

भ्रमरी प्राणायाम रक्त संचालन कम होने या ब्लड प्रेशर लो होने पर नहीं करना चाहिए |क्योंकि ब्लड प्रेशर लो होने पर रक्त संचालन की जो नलिका है वह नली थोड़ी चौड़ी हो जाती है और मोटी हो जाती है जिसके कारण रक्त संचालन की गति धीमी हो जाती है ( जिस प्रकार एक पानी का पाइप होता है और वह धीरे-धीरे थोड़ा थोड़ा और मोटा हो जाता है जिसके कारण पानी का प्रेशर धीमी गति से आने लगता है उसी प्रकार निम्न रक्तचाप में रक्त नलिका मोटी और चौड़ी हो जाती है )

अतःभ्रमरी प्राणायाम करते वक्त रक्त संचालन नली और मोटी हो जाती है | जिसके कारण रक्त संचालन और अधिक धीमा हो जाता है  ,इसलिए भ्रामरी प्राणायाम ब्लड प्रेशर लो वाले व्यक्ति को नहीं करना चाहिए । ध्यान रखें भ्रमरी प्राणायाम प्रातः काल खुले स्थान पर बैठकर करने पर अत्यधिक लाभकारी ।  प्राणायाम करने के बाद 45 मिनट तक कुछ नहीं खाना चाहिए । प्रारंभ में भ्रमरी प्राणायाम की संख्या कम रख सकते हैं धीरे धीरे भ्रमरी प्राणायाम की समय सीमा को बढ़ाया जा सकता है। 

Benefits of Bhramari Pranayama:- 

भ्रमरी प्राणायाम के लाभ:-

 भ्रमरी प्राणायाम से मानसिक शांति प्राप्त होती है  ।

आत्म साक्षात्कार के लिए ब्राह्मणी प्राणायाम बहुत लाभदायक है ।

ब्राह्मणी प्राणायाम से क्रोध को नियंत्रण किया जा सकता है ।

नकारात्मक सोच को समाप्त कर सकारात्मक सोच उत्पन्न करने में यह सहायक है ।

भ्रमरी प्राणायाम से ब्रह्मांड की सभी देवी शक्तियां हमें प्राप्त होती है।

 नींद की समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है ।

माइग्रेन दर्द में भ्रमरी प्राणायाम एक महत्वपूर्ण प्राणायाम के रूप में है ।

ब्राह्मणी प्राणायाम शरीर में संक्रमण से मुक्ति दिलाता है।          

 FAQ Related To How to do Bhramari Pranayama and it’s Benefits in 9 easy Steps

How many times we should do Bhramari Pranayama?( हम Bhramari Pranayana कितनी बार कर सकते हैं?)

इस प्राणायाम को हम कम से कम 3 से 5 बार कर सकते हैं और धीरे धीरे जैसे-जैसे आप इसमें में पारंगत होते जाएं आप यह बढ़ा भी सकते हैं।

Is Bhramari Pranayama Good For Headache? ( क्या भ्रामरी Pranayama सिर दर्द के लिए अच्छा होता है?)

जी बिल्कुल ऐसा कहा जाता है कि इस प्राणायाम को करने से Migrane में बहुत ही ज्यादा आराम मिला करता है । यह सबसे Effective योग क्रिया है जिसकी मदद से आप सर दर्द से निजात पा सकते हैं छुटकारा पा सकते हैं । आप को कम से कम 15 से 20 मिनट रोज इस आसन को करना होता है।

Is Bhramari Pranayama Good For Eyes? (क्या
Bhramari Pranayama आंखों के लिए अच्छा होता है?)

जी हां यह प्राणायाम आंखों के लिए बहुत ही अच्छा हुआ करता है। यह आंखों को Relax करता है और इससे हमारे सिर दर्द और मस्तिष्क तक आराम मिला करता है।

Final words for How to do Bhramari Pranayama and Its Benefits 

इस Article की मदद से आज हमने आप लोगों तक यह बात पहुंचाई की Bhramari Pranayama को हम कैसे कर सकते हैं। इसके Benefits क्या क्या है इस Article की मदद से हमने यह भी जाना कि क्या-क्या चीजों को हमें ध्यान में रखना होता है इस प्राणायाम को करते वक्त। हम आशा करते हैं कि आपको हमारा यह आर्टिक्ल ‘How to do Bhramari Pranayama and Its Benefits’ आपको पसंद आया होगा । इस आर्टिक्ल को पढ़ने के लिए आप सभी का धन्यवाद ।

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