Kundalini Jagrit Kaise Karen? | कुंडलिनी जागृत कैसे करे? : 9 Best Steps Of Kundalini Jagran

अध्यात्मिकता में विश्वास रखने वालों के लिए यह बहुत बड़ा विषय है कि (Kundalini Jagrit Kaise Karen?) कुंडलिनी जागृत कैसे करे? प्रत्येक व्यक्ति इस प्रशन का उत्तर जानना चाहता है । मैंने वर्षों इस विषय पर गहन अध्ययन किया है । अनेक प्रकार के ग्रंथ पढ़ें हैं । (Kundalini Jagran) कुंडलिनी जागरण पर गहन अध्ययन के आधार पर मैं आपके लिए ये जानकारी लेकर आया हूँ । मैं आशा करता हूँ कि आप सभी को इस जानकारी से लाभ होगा ।

कुंडलिनी जागृत कैसे करे
कुंडलिनी जागृत कैसे करे

Table of Contents

Kundalini Jagran I कुंडलिनी जागरण

कुंडलिनी जागरण जीवन का एक ऐसा चरण है जिसके बिना जीवन को पूरन नहीं कहा जा सकता । जो लोग अध्यात्मिकता के विषय में थोड़ा सा भी जानते हैं उन्हे कुंडलिनी जागरण के महत्व का अच्छे से पता है । उन्हे पता है कि कुंडलिनी जागरण के बिना सांसरिक जीवन या अध्यात्मिकता जीवन में पूरन सफलता प्राप्त नहीं की जा सकती । आओ जानते है कुंडलिनी जागरण कैसे होता है :-

Kundalini Jagran
Kundalini Jagran

Kundalini Jagrit Kaise Karen? | कुंडलिनी जागृत कैसे करे?

  1. रेकी हीलिंग से कुंडलिनी जागरण
  2. रेकी प्रतीकों से कुंडलिनी जागरण
  3. प्रत्येक चक्र पर मन एकाग्र करके कुंडलिनी जागरण
  4. स्फटिक द्वारा कुंडलिनी जागरण
  5. चक्रों पर पिरामिड रखकर कुंडलिनी जागरण
  6. अल्फा संगीत के द्वारा कुंडलिनी जागरण
  7. प्रत्येक चक्र के बीज मन्त्र को उच्चारण करने से कुंडलिनी जागरण
  8. श्वास प्रश्वास विधि से कुंडलिनी जागरण
  9. सकारात्मक स्वसूचन विधि से कुंडलिनी जागरण
Kundalini Jagrit Kaise Karen
Kundalini Jagrit Kaise Karen

रेकी हीलिंग से कुंडलिनी जागरण : –

सात चक्रों को जाग्रत करने का सबसे अच्छा तरीका प्रतिदिन सातों चक्रों की रेकी हीलिंग करनी चाहिए। प्रतिदिन रेकी उपचार करने के सुप्त हुए चक्र जाग्रत होते हैं। मैने स्वयं अपने चक्रों को जाग्रत करने के लिए अनेक विधियां अपनाई परन्तु रेकी हीलिंग उन सबसे श्रेश्ठ है।   क्योंकि इस विधि में हम चक्रों को सीधे उर्जा देते हैं। मात्र कुछ दिनो के रेकी उपचार के बाद हम महसूस कर सकते हैं कि हमारे चक्र जाग्रत हो गए हैं।  

यह पता करने के लिए कि रेकी उपचार से हमारा कौन सा चक्र जाग्रत हुआ हैऔर कौन सा नही, के लिए चक्रा स्कैनर का प्रयोग किया जा सकता है। चक्रों को जाग्रत करने से पहले उनको शुद्ध करना चाहिए। शुद्ध करने के लिए रेकी शक्ति का आवाह्न करें।   फिर सहस्रार चक्र पर हथेली रखकर मन ही मन कहें हे! रेकी शक्ति मेरे सहस्रार चक्र को शुद्ध करो-3। सभी अवरोधों को दूर करो-3 ।  

फिर ऐसे ही मूलाधार चक्र तक करें। चक्रों को जाग्रत करने के लिए रेकी शक्ति का आवाह्न करें।  फिर मूलाधार चक्र पर हथेली रखकर मन ही मन कहें हे! रेकी शक्ति मेरे मूलाधार चक्र को जाग्रत करो-3 । ऐसा सहस्रार चक्र तक लगातार करें।   प्रत्येक चक्र पर कम से कम 5 मिनट तक रेकी उपचार करना चाहिए। अन्त में कहें मेरे सभी चक्र जाग्रत है-51 । यह क्रिया प्रतिदिन करनी चाहिए। रेकी उपचार के बाद रेकी शक्ति को बन्द करें। सबका धन्यवाद करें। रेकी को वापस ब्रह्मांड में भेजे।  

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रेकी प्रतीकों से कुंडलिनी जागरण:-

जैसा कि पहले भी बताया जा चूका है कि रेकी सिम्बलों द्वारा किया गया रेकी उपचार बहुत शक्तिषाली होता है।   प्रतीक 1 से सभी चक्रों को जाग्रत करना चाहिए अनादहत चक्र, मणिपुर चक्र, व आज्ञाचक्र पर प्रतीक 121 से रेकी उपचार करना चाहिए। शुद्ध करते समय उपर से नीचे की ओर आते हैं।   हथेलियों को प्रत्येक चक्र पर ऐन्टी क्लाक वाइज घुमाते हैं बल्कि जाग्रत करने के लिये नीचे से उपर की तरफ जाते हैं और हथेलियों को क्लाकवाइज घुमाते हैं।

प्रत्येक चक्र पर मन एकाग्र करके कुंडलिनी जागरण  :-

चक्रों को जाग्रत करने की यह भी एक शक्तिषाली विधि है। इस विधि में प्रत्येक चक्र पर मन को एकाग्र किया जाता है।   इस विधि को करने के लिए सुखासन में कुर्सी पर बैठकर या फिर लेटर भी की जा सकती है। सुखासन में बैठ कर एक मिनट तक अपनी ष्वासों पर ध्यान को केन्द्रित करें।  

फिर आँखें बन्द करके पूरा का पूरा ध्यान अपने मूलाधार पर लेकर जाएँ । मन ही मन कहें मेरा मूलाधार चक्र जाग्रत हो-3 । मूलाधार चक्र की छवि व रंग को ध्यान रखें।  एक चक्र पर कम से कम 5 मिनट तक ध्यान लगाएँ रखें। ऐसा सह्सार चक्र तक करें। इस विधि को करने के लिए कोई जल्दबाजी न करें। इस विधि का अभ्यास धीरे-2 आगे बढ़ता है।   यदि कम समय है तो कम समय के लिए यह क्रिया करें। परन्तु सभी चक्रों पर अवष्य करे। धीरे-2 आपके चक्र जाग्रत होने प्रारम्भ हो जायेंगे। चक्र स्थान पर संपदन व सनसनाहट चक्र जाग्रत होने की ओर संकेत करते हैं।

स्फटिक द्वारा कुंडलिनी जागरण :-

इस विधि में चार्ज स्फटिक की पैन्सिल व चार्ज स्फटिक पिरामिड का प्रयोग किया जाता है। चक्रों को शुद्ध करने के लिए 21 चार्ज क्रिस्टल का प्रयोग किया जाता है। चक्रों को शुद्ध करने के लिए व नकारात्मक उर्जा को शरीर से निकालने के लिए चार्ज स्फटिक पैन्सिल को उल्टा करके प्रत्येक चक्र पर रखा जाता है अर्थात् पैंसिल का मूह मूलाधार चक्र की तरफ होना चाहिए।  सातों चक्रां पर सात पैंसिल व दो-दो पैंन्सिल शरीर के साथ में रखी जाती है।

इस क्रिया को केवल लेटकर ही किया जा सकता है।   चक्रों को चार्ज करने के लिए इन पैन्सिलों का मूह सह्सार चक्र की तरफ करना चाहिए। एक अवस्था में कम से कम 15 मिनट तक विश्राम करना चाहिए।   चक्रों को शुद्ध करते समय मन ही मन दोहराएँ मेरे सभी चक्र शुद्ध हो रहे हैं-3, सभी अवरोध दूर हो रहे हैं-3 ।   चक्रों को जाग्रत करते समय मनही मन दौहराएँ । मेरे सभी चक्र जाग्रत हो रहे है-3 । इस सम्पूण विधि को करने के लिए 30 मिनट का समय लगता है।

चक्रों पर पिरामिड रखकर कुंडलिनी जागरण :-

पिरामिड सकारात्मक उर्जा के बहुत बड़े स्त्रोत हैं। लेटकर प्रत्येक चक्र पर चार्ज स्फटिक,धातु या लकड़ी का पिरामिड रखें।   इसी अवस्था में 30 मिनट तक लेटे रहें। म नही मन दौहराएँ मेरे सभी चक्र जाग्रत हो रहे हैं-3। अन्त में 5 मिनट दौहराएँ – मेरे सभी चक्र जाग्रत हैं-3 ।   जब ऐसी कोई भी क्रिया करें मन का संकल्प दृड़ होना चाहिए। मन के संकल्प कम से कम शब्दों में व स्पश्ट होना चाहिए।   मन ही मन विशवास भी करना चाहिए कि ऐसा हो रहा है। तभी ऐसी क्रियाओं का लाभ मिल पाएगा। आजमाने के लिए ऐसी क्रिया नही करनी चाहिए।

अल्फा संगीत के द्वारा कुंडलिनी जागरण :-

इस विधि को तीनों तरह से किया जा सकता है- लेटकर, कुर्सी पर बैठकर व सुखासन में बैठकर। मैं इस विधि को लेटकर करने की सलाह देती हूँ । इस विधि को करने के लिए एक षांत कमरें का चयन करें। अल्फा संगीत चलाएँ । कमरे में न अधिक रोशनी हो और न ही बिल्कुल अन्धेरा। यदि इस क्रिया को दिन में करें तो कमरे में पर्दे लगाएँ । कमरे में केवल हल्का प्रकाश हो। बैड या पलंग पर लेटकर शरीर को ढीला छोड़ दें।  

पहले अपने पैरों को ढीला र्छोडें फिर शरीर का उपर वाला हिस्सा ढीला छोड़ते जाएँ ।  फिर दोनों हाथों को ढिला छोड़े। कंधों को गर्दन को, नाक, कान व आखों ढीला छोड़ें। मनही मन करें मेरे दोनो पैर घुटने जंघाएं और इसी प्रकार शरीर के उपर के अन्य अंग षांत होने जा रहे हैं-3 ।  

इसी अवस्था में 30 मिनट तक लेटे रहें। यह क्रिया एक लम्बी क्रिया है इस क्रिया में हमारे चक्र स्वतः ही जाग्रत हो जाते हैं।   इस क्रिया से उठने के बाद हम तरोताजा महसूस करते हैं। यह इस बात का संकेत है कि शरीर में सकारात्मक उर्जा का संचारण हो रहा है। इस क्रिया को नियमित रूप से करना चाहिए।  

जब हम इस क्रिया को लगातार 6 माह तक प्रतिदिन करते हैं तो हमें आष्चर्यजनक परिणाम मिलते हैं।   हमारी याद करने की शक्ति बढ़ती है। हमारा स्वभाव सकारात्मक होता है। हमारी रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। आभामण्डल शक्तिषाली होता है, हमारा व्यक्तित्व भी प्रभावषाली बनता है। यह सभी शभ संकेत होते हैं। ये सभी शुभ संकेत करते हैं कि धीरे-2 हमारे चक्र जाग्रत हो रहे हैं। और अधिक अभ्यास से मनचाहे परिणाम प्राप्त किया जा सकते हैं।

प्रत्येक चक्र के बीज मन्त्र को उच्चारण करने से कुंडलिनी जागरण :-

जैसा कि पहले भी बताया गया है कि हमारे सात मुख्य चक्र होते हैं। प्रत्येक चक्र का एक बीज मन्त्र होता है।   ये बीज मन्त्र है लं, वं, रं, यं, हं ऊॅं। मूलाधार चक्र का बी मंत्र लंस्वाधिश्ठान चक्र का – वंमणिपुर चक्र का रंअनाहद चक्र का-यंविशुद्ध चक्र का- हंऔर आज्ञा चक्र का ऊॅं है।   सह्सार चक्र में अनेक बीज मन्त्र होते हैं। इस विधि को सुखासन में बैठकर ही करना चाहिए। 

सुखासन में बैठने के बाद प्रत्येक चक्र के बीज मंत्र का उच्चारण जोर-2 से करना चाहिए। प्रत्येक बीज मंत्र को 2 मिनट तक उच्चारण करना चाहिए। सबसे पहल मूलाधार,फिर स्वाधिश्ठान, मणिपुर, अनाहद, विशुद्ध व आज्ञा चक्र के बीज मन्त्र का उच्चारण करना चाहिए। जब चक्र के बीज मन्त्र का उच्चारण करें तब उस चक्र की छवि व स्थिति का भी ध्यान करें । जैसे आपने मूलाधार चक्र के बीज मन्त्र का उच्चारण किया है तब मूलाधार चक्र का रंग लाल, स्थिति रीड़ की हड्डी का सबसे नीचला हिस्सा और उसकी छवि का ध्यान करना चाहिए। ऐसा नियमित करने से धीरे-2 हमारे चक्र जाग्रत होते हैं।

श्वास प्रश्वास विधि से कुंडलिनी जागरण :-

इस विधि को सुखासन में बैठकर ही करना चाहिए। सबसे पहले पूरा का पूरा ध्यान अपनी श्वास पर लेकर जाएँ । प्रत्येक आने वाली श्वास व जाने वाली श्वास को पूरे ध्यान से महसूस करें। यह महसूस करें कि आने वाली श्वास कैसी है। ठण्डी या गर्म।   ऐसे ही जाने वाली श्वास को भी महसूस करें। यह महसूस करें कि श्वास बाएँ नथूने से आ रही है या दाएँ नथूने से या फिर दोनों नथूनों से। 

यह भी महसूस करें कि श्वास नथूने के किस हिस्से को स्पर्ष कर रही है। इस विधि को करने के लिए बड़े ही धैर्य की आवष्यकता होती है।   इस विधि का अभ्यास धीरे-2 आगे बढ़ता है। अब अपना पूरा का पूरा ध्यान मूलाधार चक्र पर लेकर जाएं।  

श्वास की गति स्वाभाविक होनी चाहिए। श्वास की गति को रोकने के लिए व लेने के लिए आपको कुछ भी नहीं करना है।   श्वास को स्वतः ही आने दे व जाने दें। अपना प्रयास उसके अन्दर न जोड़ें। अब महसूस करें कि मूलाधार चक्र में क्या हलचल हो रही है।  फिर क्रमषः आगे के चक्रों पर भी 5 मिनट तक ध्यान कर महसूस करें कि उस चक्र में क्या हलचल हो रही है।  

इस विधि में श्वास का बहुत महत्व है। जब तक आपको ष्वासों का सही ज्ञान न हो आगे न बढ़ें।इस क्रिया का नियमित अभ्यास करने से धीरे-2 चक्र जाग्रत होते हैं।   उपरलिखित सभी क्रियाओं को करने के लिए रेकी मास्टर से अवष्य सलाह लेनी चाहिए।

सकारात्मक स्वसूचन विधि से कुंडलिनी जागरण :-

मन ही मन सकारात्मक वाक्य दोहराने मात्र से भी सातों चक्रों का जाग्रत होते हैं। मन ही मन यह सकारात्मक वाक्य दोहराने चाहिए- 1 मेरे सातों चक्र चार्ज हैं…..हील हैं….जाग्रत हैं….

2 मेरे सातों चक्रों की उर्जा सन्तुलित है….  

Kundalini Jagran Through Positive Affirmation
Kundalini Jagran Through Positive Affirmation

यह विधि बहुत ही शक्तिशाली विधि है। इस विधि से सातों चक्रों का जाग्रत किया जा सकता है। इस विधि का प्रयोग करने के लिए अलग से कोई समय देने की कोई आवयकशता नहीं होती।   इस विधि का प्रयोग किसी भी समय या स्थान पर किया जा सकता हैं। आपको सिर्फ इतना करना है कि मन ही मन उपरलिखित वाक्यों कों दौहराना मात्र है। प्रतिदिन कम से कम 11 बार इन वाक्यों कों दौहराना चाहिए।

Focus Points Related to Kundalini Shakti Ko Kaise Jagrit Karen:-

Kundalini Jagran

कुंडलिनी जागरण के बाद क्या होगा ?

क्या होगा जब कुंडलिनी जागरण होगा ?

कुंडलिनी जागरण के बाद क्या होता है ?

कुंडलिनी जागरण कैसे करें ?

FAQ Related to Kundalini Shakti Ko Kaise Jagrit Karen:-

Best books on Kundalini Meditation?

Kundalini Naad Brahma written by – Dr. Narayan Dutt Shrimali is the Best books on Kundalini Meditation.

ऐसे संत जिन्होंने Kundalini जागरण की हो ?

डॉ. नारायण दत्त श्रीमाली (Dr. Narayan Dutt Shrimali) एक ऐसे संत जिन्होंने कुंडलिनी जागरण की ।Dr Narayan Dutt shrimali एक ऐसी जानी मानी हस्ती हैं जिन्होंने कुंडलिनी जागरण की है बहुत कठिन परिश्रम के बाद ऐसा संभव हो पाया और आज भी बहुत लोगों की मदद भी करते हैं कुंडलिनी जागरण करने में और वह आज भी लोगों का मार्गदर्शन करते हैं इस विषय में।

गर्भ में शिशु की Kundalini जागरण कैसे करें?

डॉ. नारायण दत्त श्रीमाली (Dr. Narayan Dutt Shrimali) द्वारा दीये गए प्रवचन सुनकर और उनसे शक्तिपात दीक्षा ले कर गर्भ में शिशु की कुंडलिनी जागरण कर सकते हैं । ऐसा करने के लिए उनके द्वारा दिये गए प्रवचन मैं गर्भ में शिशु को चेतना देता हूँ सुनना चाहिए । Dr Narayan Dutt shrimali एक ऐसी जानी मानी हस्ती हैं जिन्होंने कुंडलिनी जागरण की है बहुत कठिन परिश्रम के बाद ऐसा संभव हो पाया और आज भी बहुत लोगों की मदद भी करते हैं कुंडलिनी जागरण करने में और वह आज भी लोगों का मार्गदर्शन करते हैं इस विषय में।

Kundalini जागरण होगा के बाद क्या होता है?

Kundalini जागरण एक आंतरिक परकिरया है न की बाही । आज कल कुंडलिनी जागरण की बहुत सी विधि है। जिसमें बताया जाता है कि कुंडलिनी जागरण के बाद अनेक तरह की शक्तियाँ मिल जाती है परंतु यह कोई नहीं बताता कि किस तरह की शक्तियाँ मिलेंगी।

जैसा कि मैंने बताया कि कुंडलिनी जागरण एक आंतरिक बदलाव की  एक परकिरया है जैसे जैसे कुंडलिनी के चक्र जाग्रत होते चले जाते है वैसे वैसे दिमाग मैं चलने वाले विचार कम होते चले जाते है और हम मानसिक रूप से अच्छा महसूस करने लग जाते है और  हम अपने अंदर गहन शांति महसूस करते है । Kundalini जागरण की यह परकिरया अंदर अनेक बदलाव ले कर आती है । कुंडलिनी जागरण से शरीर के हार्मोन्स बैलेन्स हो जाते है । शरीर पूरी तरह से स्वस्थ हो जाता है ।

सभी कार्यों मैं सफलता मिलने लग जाती है । प्रमुख जो बदलाव आता है वह है एकाग्रता । यदि किसी भी व्यक्ति की एकाग्रता बढ़ती  है तो इस का प्रभाव सभी कार्यों पर पड़ता ही है । कुंडलिनी जागरण के बाद भी यह संसार वैसा ही रहता जैसे पहले था परंतु अंदर एक समझ पैदा होती है । वह है ज्ञान कि समझ ।

और जब ज्ञान की समझ आ जाती है तब हमारा देखने का नजरिया ही बदल जाता है । और जब नजरिया बदल जाता है तो यह संसार वैसा ही हो जाता है जैसे हम सोचते है । हम अंदर से नाच रहे होते है गा रहे होते है और मस्ती मैं होते है । अंततः हम सभी का एक ही लक्ष्य होता नाचना गाना झूमना मस्त रहना वह भी बिना किसी वजह के, एक बच्चे की तरह ………..

Final words for Kundalini Jagrit Kaise Karen:-

इस आर्टिकल के माध्यम से आज हम लोगों ने आपको नो इजी स्टेप्स बताएं जिनकी मदद से आप अपनी Kundalini को जागृत कर सकते हैं इस आर्टिकल में आज हमने Kundalini जागरण से संबंधित और सारे विषयों पर चर्चा करें जिनमें से सकारात्मक सोच सूचन विधि से कुंडलिनी जागरण कैसे कर सकते हैं वह हमने बताया उसी के साथ साथ हमने आज आपको इस बारे में भी बताया कि वह कौन-कौन से फोकस पॉइंट है जो हमें ध्यान में रखनी चाहिए कुंडलिनी शक्ति को जागृत करते वक्त। हम आशा करते हैं कि आपको हमारा यह आर्टिक्ल ‘Kundalini Jagrit Kaise Karen’ पसंद आया होगा । इस आर्टिक्ल को पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद।

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