9 Best Kundalini Jagran Karne Ka Aasan Tarika Kya Hai Hindi Me

(Kundalini Jagran Karne Ka Aasan Tarika Kya Hai) कुंडलिनी जागरण करने का आसान तरीका क्या है ?:-

(Kundalini Jagran Karne Ka Aasan Tarika Kya Hai- Kundalini Jagran करने का आसान तरीका क्या है ? ) Easy Way of Kundalini Jagran एक सरल तरीका है जिसे कोई भी सामान्य व्यक्ति भी प्रयोग कर सकता है । यह बिल्कुल सुरक्षित तरीका है । परंतु Kundalini Jagran की कोई भी विधि किसी योग्य गुरु के सानिध्य में ही करनी चाहिए । वैसे भी Kundalini Jagran का पूर्ण ज्ञान बहुत ही कम लोगों को होता है ।

Kundalini Jagran Karne Ka Aasan Tarika Kya Hai Hindi Me
Kundalini Jagran Karne Ka Aasan Tarika Kya Hai Hindi Me

कुंडलिनी जागरण क्या है ?(What is Kundlini Jagran ?) :- 

Kundalini Jagran एक आंतरिक प्रक्रिया  है न की बाही । आज कल Kundalini Jagran की बहुत सी विधि है । जिसमें बताया जाता है कि Kundalini Jagran के बाद अनेक तरह की शक्तियाँ मिल जाती है परंतु यह कोई नहीं बताता कि किस तरह की शक्तियाँ मिलेंगी।

जैसे कि  मैंने बताया कि Kundalini Jagran एक आंतरिक बदलाव की  एक प्रक्रिया है जैसे जैसे कुंडलिनी के चक्र जाग्रत होते चले जाते है वैसे वैसे दिमाग मैं चलने वाले विचार कम होते चले जाते है और हम मानसिक रूप से अच्छा महसूस करने लग जाते है और  हम अपने अंदर गहन शांति महसूस करते है Kundalini Jagran की यह प्रक्रिया अंदर अनेक बदलाव ले कर आती है ।

कुंडलिनी जागरण क्या है ?(What is Kundlini Jagran ?)

Kundalini Jagran से शरीर के हार्मोन्स बैलेन्स हो जाते है । शरीर पूरी तरह से स्वस्थ हो जाता है । सभी कार्यों मैं सफलता मिलने लग जाती है ।

प्रमुख जो बदलाव आता है वह है एकाग्रता । यदि किसी भी व्यक्ति की एकाग्रता बढ़ती  है तो इस का प्रभाव सभी कार्यों पर पड़ता ही है ।

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Kundalini Jagran के बाद भी यह संसार वैसा ही रहता जैसे पहले था परंतु अंदर एक समझ पैदा होती है ।

वह है ज्ञान कि समझ । और जब ज्ञान की समझ आ जाती है तब हमारा देखने का नजरिया ही बदल जाता है ।

और जब नजरिया बदल जाता है तो यह संसार वैसा ही हो जाता है जैसे हम सोचते है । हम अंदर से नाच रहे होते है गा रहे होते है और मस्ती मैं होते है । अंततः हम सभी का एक ही लक्ष्य होता नाचना गाना झूमना मस्त रहना वह भी बिना किसी वजह के, एक बच्चे की तरह ………..

Kundalini Jagran जीवन का एक ऐसा लक्ष्य है जिसको प्राप्त किए बिना जीवन को पूर्ण नहीं कहा जा सकता ।

जो लोग अध्यात्मिकता के विषय में थोड़ा सा भी जानते हैं उन्हे कुंडलिनी जागरण के महत्व का अच्छे से पता है ।

उन्हे पता है कि Kundalini Jagran के बिना सांसरिक जीवन या अध्यात्मिकता जीवन में पूर्ण सफलता प्राप्त नहीं की जा सकती ।

आज बात करेंगे Easy Way of Kundlini Jagran (कुंडलिनी जागरण करने का आसान तरीका ) की । तो आओ जानते है वो कौन कौन से आसान तरीके हैं जिनसे Kundalini Jagran किया जा सकता है :-

9 Easy Way of Kundalini Jagran:-

9 Kundalini Jagran करने के आसान तरीके

Easy Way of Kundalini Jagran
Easy Way of Kundalini Jagran
  1. रेकी हीलिंग से
  2. रेकी प्रतीकों से
  3. प्रत्येक चक्र पर मन एकाग्र करके
  4. स्फटिक द्वारा
  5. चक्रों पर पिरामिड रखकर
  6. अल्फा संगीत के द्वारा
  7. प्रत्येक चक्र के बीज मन्त्र को उच्चारण करने से
  8. श्वास प्रश्वासविधि से
  9. सकारात्मक स्वसूचन विधि से

रेकी हीलिंग सेः-

सात चक्रों को जाग्रत करने का सबसे अच्छा तरीका प्रतिदिन सातों चक्रों की रेकी हीलिंग करनी चाहिए। प्रतिदिन रेकी उपचार करने के सुप्त हुए चक्र जाग्रत होते हैं। मैने स्वयं अपने चक्रों को जाग्रत करने के लिए अनेक विधियां अपनाई परन्तु रेकी हीलिंग उन सबसे श्रेष्ठ है।

क्योंकि इस विधि में हम चक्रों को सीधे उर्जा देते हैं। मात्र कुछ दिनो के रेकी उपचार के बाद हम महसूस कर सकते हैं कि हमारे चक्र जाग्रत हो गए हैं। यह पता करने के लिए कि रेकी उपचार से हमारा कौन सा चक्र जाग्रत हुआ है  और कौन सा नही, के लिए चक्रा स्कैनर का प्रयोग किया जा सकता है।  

चक्रों को जाग्रत करने से पहले उनको शुद्ध करना चाहिए। शुद्ध करने के लिए रेकी शक्ति का आवाह्न करें। फिर सहस्रार चक्र पर हथेली रखकर मन ही मन कहें हे! रेकी शक्ति मेरे सहस्रार चक्र को शुद्ध करो-3। सभी अवरोधों को दूर करो-3 ।

फिर ऐसे ही मूलाधार चक्र तक करें। चक्रों को जाग्रत करने के लिए रेकी शक्ति का आवाह्न करें। फिर मूलाधार चक्र पर हथेली रखकर मन ही मन कहें हे! रेकी शक्ति मेरे मूलाधार चक्र को जाग्रत करो-3 ।

ऐसा सहस्रार चक्र तक लगातार करें। प्रत्येक चक्र पर कम से कम 5  मिनट तक रेकी उपचार करना चाहिए। अन्त में कहें मेरे सभी चक्र जाग्रत है-51 । यह क्रिया प्रतिदिन करनी चाहिए।

रेकी उपचार के बाद रेकी शक्ति को बन्द करें। सबका धन्यवाद करें। रेकी को वापस ब्रह्मांड  में भेजे। मेरे अनुभव से रेकी हीलिंग Easy Way of Kundlini Jagran (कुंडलिनी जागरण का आसान तरीका ) है ।

रेकी प्रतीकों से:-  

जैसा कि पहले भी बताया जा चूका है कि रेकी सिम्बलों द्वारा किया गया रेकी उपचार बहुत शक्तिशाली होता है। प्रतीक 1 से सभी चक्रों को जाग्रत करना चाहिए अनादहत चक्र, मणिपुर चक्र, व आज्ञाचक्र पर प्रतीक 121 से रेकी उपचार करना चाहिए।

शुद्ध करते समय उपर से नीचे की ओर आते हैं। हथेलियों को प्रत्येक चक्र पर ऐन्टी क्लाक वाइज घुमाते हैं बल्कि जाग्रत करने के लिये नीचे से उपर की तरफ जाते हैं और हथेलियों को क्लाकवाइज घुमाते हैं।

प्रत्येक चक्र पर मन एकाग्र करकेः-

चक्रों को जाग्रत करने की यह भी एक शक्तिशाली विधि है। इस विधि में प्रत्येक चक्र पर मन को एकाग्र किया जाता है। इस विधि को करने के लिए सुखासन में कुर्सी पर बैठकर या फिर लेटर भी की जा सकती है।

सुखासन में बैठ कर एक मिनट तक अपनी स्वाशों पर ध्यान को केन्द्रित करें। फिर आँखें बन्द करके पूरा का पूरा ध्यान अपने मूलाधार पर लेकर जाएँ । 

मन ही मन कहें मेरा मूलाधार चक्र जाग्रत हो-3 । मूलाधार चक्र की छवि व रंग को ध्यान रखें। एक चक्र पर कम से कम 5  मिनट तक ध्यान लगाएँ  रखें। ऐसा सह्सार चक्र तक करें। इस विधि को करने के लिए कोई जल्दबाजी न करें। इस विधि का अभ्यास धीरे-2  आगे बढ़ता है।

यदि कम समय है तो कम समय के लिए यह क्रिया करें। परन्तु सभी चक्रों पर अवष्य करे। धीरे-2  आपके चक्र जाग्रत होने प्रारम्भ हो जायेंगे। चक्र स्थान पर संपदन व सनसनाहट चक्र जाग्रत होने की ओर संकेत करते हैं। प्रत्येक चक्र पर मन एकाग्र करने की विधि भी Easy Way of Kundlini Jagran (कुंडलिनी जागरण का आसान तरीका ) है ।

स्फटिक द्वाराः-

इस विधि में चार्ज स्फटिक की पैन्सिल व चार्ज स्फटिक पिरामिड का प्रयोग किया जाता है। चक्रों को शुद्ध करने के लिए 21  चार्ज क्रिस्टल का प्रयोग किया जाता है। चक्रों को शुद्ध करने के लिए व नकारात्मक उर्जा को शरीर से निकालने के लिए चार्ज स्फटिक पैन्सिल को उल्टा करके प्रत्येक चक्र पर रखा जाता है अर्थात् पैंसिल का मूह मूलाधार चक्र की तरफ होना चाहिए। 

सातों चक्रां पर सात पैंसिल व दो-दो पैंन्सिल शरीर के साथ में रखी जाती है। इस क्रिया को केवल लेटकर ही किया जा सकता है। चक्रों को चार्ज करने के लिए इन पैन्सिलों का मूह  सह्सार चक्र की तरफ करना चाहिए। एक अवस्था में कम से कम 15  मिनट तक विश्राम करना चाहिए।

चक्रों को शुद्ध करते समय मन ही मन दोहराएँ  मेरे सभी चक्र शुद्ध हो रहे हैं-3, सभी अवरोध दूर हो रहे हैं-3 । चक्रों  को जाग्रत करते समय मन  ही मन दौहराएँ । मेरे सभी चक्र जाग्रत हो रहे है-3 । इस सम्पूण विधि को करने के लिए 30  मिनट का समय लगता है।

चक्रों पर पिरामिड रखकरः-

पिरामिड सकारात्मक उर्जा के बहुत बड़े स्त्रोत हैं। लेटकर प्रत्येक चक्र पर चार्ज स्फटिक, धातु या लकड़ी का पिरामिड रखें। इसी अवस्था में 30  मिनट तक लेटे रहें। म नही मन दौहराएँ  मेरे सभी चक्र जाग्रत हो रहे हैं-3। अन्त में 5  मिनट दौहराएँ  – मेरे सभी चक्र जाग्रत हैं-3 ।

जब ऐसी कोई भी क्रिया करें मन का संकल्प दृड़ होना चाहिए। मन के संकल्प कम से कम शब्दों में व स्पष्ट होना चाहिए। मन ही मन विशवास भी करना चाहिए कि ऐसा हो रहा है। तभी ऐसी क्रियाओं का लाभ मिल पाएगा। आजमाने के लिए ऐसी क्रिया नही करनी चाहिए।

अल्फा संगीत के द्वाराः-

इस विधि को तीनों तरह से किया जा सकता है- लेटकर, कुर्सी पर बैठकर व सुखासन में बैठकर। मैं इस विधि को लेटकर करने की सलाह देती हूँ । इस विधि को करने के लिए एक शांत कमरें का चयन करें। अल्फा संगीत चलाएँ । कमरे में न अधिक रोशनी हो और न ही बिल्कुल अन्धेरा।

यदि इस क्रिया को दिन में करें तो कमरे में पर्दे लगाएँ । कमरे में केवल हल्का प्रकाश हो। बैड या पलंग पर लेटकर शरीर को ढीला छोड़ दें।पहले अपने पैरों को ढीला छोड़ें फिर शरीर का उपर वाला हिस्सा ढीला छोड़ते जाएँ ।  

फिर दोनों हाथों  को ढिला छोड़े। कंधों को गर्दन को, नाक, कान व आखों ढीला छोड़ें। मन  ही मन करें मेरे दोनो पैर घुटने जंघाएं और इसी प्रकार शरीर के उपर के अन्य अंग शांत होने जा रहे हैं-3 । इसी अवस्था में 30  मिनट तक लेटे रहें।

यह क्रिया एक लम्बी क्रिया है इस क्रिया में हमारे चक्र स्वतः ही जाग्रत हो जाते हैं। इस क्रिया से उठने के बाद हम तरोताजा महसूस करते हैं। यह इस बात का संकेत है कि शरीर में सकारात्मक उर्जा का संचारण हो रहा है। इस क्रिया को नियमित रूप से करना चाहिए।

जब हम इस क्रिया को लगातार 6 माह तक प्रतिदिन करते हैं तो हमें आष्चर्यजनक परिणाम मिलते हैं। हमारी याद करने की शक्ति बढ़ती है। हमारा स्वभाव सकारात्मक होता है। हमारी रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।

आभामण्डल शक्तिशाली होता है, हमारा व्यक्तित्व भी प्रभावशाली बनता है। यह सभी शभ संकेत होते हैं। ये सभी शुभ  संकेत करते हैं कि धीरे-2  हमारे चक्र जाग्रत हो रहे हैं। और अधिक अभ्यास से मनचाहे परिणाम प्राप्त किया जा सकते हैं।

प्रत्येक चक्र के बीज मन्त्र को उच्चारण करने सेः-

जैसा कि पहले भी बताया गया है कि हमारे सात मुख्य चक्र होते हैं। प्रत्येक चक्र का एक बीज मन्त्र होता है। ये बीज मन्त्र है लं, वं, रं, यं, हं ऊॅं। मूलाधार चक्र का बी मंत्र लं स्वाधिश्ठान चक्र का – वं मणिपुर चक्र का रं अनाहद चक्र का-यं विशुद्ध चक्र का- हं और आज्ञा चक्र का ऊॅं है।

सह्सार चक्र में अनेक बीज मन्त्र होते हैं। इस विधि को सुखासन में बैठकर ही करना चाहिए। सुखासन में बैठने के बाद प्रत्येक चक्र के बीज मंत्र का उच्चारण जोर-2 से करना चाहिए। प्रत्येक बीज मंत्र को 2 मिनट तक उच्चारण करना चाहिए।

सबसे पहल मूलाधार, फिर स्वाधिश्ठान, मणिपुर, अनाहद, विशुद्ध व आज्ञा चक्र के बीज मन्त्र का उच्चारण करना चाहिए। जब चक्र के बीज मन्त्र का उच्चारण करें तब उस चक्र की छवि व स्थिति का भी ध्यान करें । जैसे आपने मूलाधार चक्र के बीज मन्त्र का उच्चारण किया है तब मूलाधार चक्र का रंग लाल, स्थिति रीड़ की हड्डी का सबसे नीचला हिस्सा और उसकी छवि का ध्यान करना चाहिए।

ऐसा नियमित करने से धीरे-2  हमारे चक्र जाग्रत होते हैं। प्रत्येक चक्र के बीज मन्त्र को उच्चारण करने की विधि भी Easy Way of Kundlini Jagran (कुंडलिनी जागरण का आसान तरीका ) है ।

श्वास प्रश्वासविधि सेः-

इस विधि को सुखासन में बैठकर ही करना चाहिए। सबसे पहले पूरा का पूरा ध्यान अपनी श्वासों पर लेकर जाएँ । प्रत्येक आने वाली श्वास व जाने वाली श्वास को पूरे ध्यान से महसूस करें। यह महसूस करें कि आने वाली श्वास कैसी है।

ठण्डी या गर्म। ऐसे ही जाने वाली श्वास को भी महसूस करें। यह महसूस करें कि श्वास बाएँ  नथूने से आ रही है या दाएँ  नथूने से या फिर दोनों नथूनों से। यह भी महसूस करें कि श्वास नथूने के किस हिस्से को स्पर्श कर रही है। इस विधि को करने के लिए बड़े ही धैर्य की आवश्यकता होती है।

इस विधि का अभ्यास धीरे-2  आगे बढ़ता है। अब अपना पूरा का पूरा ध्यान मूलाधार चक्र पर लेकर जाएं। श्वास की गति स्वाभाविक होनी चाहिए। श्वास की गति को रोकने के लिए व लेने के लिए आपको कुछ भी नहीं करना है।      

श्वास को स्वतः ही आने दे व जाने दें। अपना प्रयास उसके अन्दर न जोड़ें। अब महसूस करें कि मूलाधार चक्र में क्या हलचल हो रही है। फिर क्रमश आगे के चक्रों पर भी 5  मिनट तक ध्यान कर महसूस करें कि उस चक्र में क्या हलचल हो रही है।

इस विधि में श्वास  का बहुत महत्व है। जब तक आपको श्वासों का सही ज्ञान न हो आगे न बढ़ें। इस क्रिया का नियमित अभ्यास करने से धीरे-2  चक्र जाग्रत होते हैं। उपरलिखित सभी क्रियाओं को करने के लिए रेकी मास्टर से अवष्य सलाह लेनी चाहिए।

सकारात्मक स्वसूचन विधि सेः-

मन ही मन सकारात्मक वाक्य दोहराने मात्र से भी सातों चक्रों  का जाग्रत होते हैं। मन ही मन यह सकारात्मक वाक्य दोहराने चाहिए-

1    मेरे सातों चक्र चार्ज हैं…..हील हैं….जाग्रत हैं….

2    मेरे सातों चक्रों की उर्जा सन्तुलित है….

  यह विधि बहुत ही शक्तिशाली विधि है। इस विधि से सातों चक्रों  का जाग्रत किया जा सकता है। इस विधि का प्रयोग करने के लिए अलग से कोई समय देने की कोई आवयकशता  नहीं होती। इस विधि का प्रयोग किसी भी समय या स्थान पर किया जा सकता हैं।

आपको सिर्फ इतना करना है कि मन ही मन उपरलिखित वाक्यों कों दौहराना मात्र है। प्रतिदिन कम से कम 11  बार इन वाक्यों कों दौहराना चाहिए। आज हमने बात की Easy Way of Kundlini Jagran (कुंडलिनी जागरण का आसान तरीका )। जिसमे मैंने आपको अनेक तरीके बताएं हैं । ये सब तरीके वो है जो एक आम गृस्थ व्यक्ति अपना कर अपने जीवन को धन्य कर सकता है । 

FAQ related to Kundalini jagran karne ke Aasan Tareeke

What is the meaning of Yoga ?( योग का सही अर्थ क्या है?)

यदि हम योग के सही अर्थ के बारे में बात करें तो योग्य है ऐसा तत्व है जिसकी मदद से कोई भी दो चीजें जुड़ सकती है । अभी यहां पर हमारा मतलब दो चीजों से है आपका यानी इंसान का परमात्मा से या फिर अपने आंतरिक आत्मा से जुड़ना योग एक वह माध्यम है । जिसकी मदद से आप अपने शरीर और अपनी आत्मा से जुड़ सकते हैं।

Who is the writer of Kundalini Yoga ? ( Kundalini Yoga के लेखक कौन थे?)

स्वामी शिवानंद कुंडलिनी योग के लेखक के तौर पर जाना जाता है स्वामी शिवानंद एक ऐसे योग गुरु थे । जिन्हें हर तरह के योग का ज्ञान था ऐसा कहा जाता है कि स्वामी शिवानंद एक ऐसे गुरु थे जो योग क्रिया में निपुण थे और साथ ही साथ उनकी योग विद्या इतनी गहरी थी कि उन्होंने इस पर 300 से ज्यादा किताबें लिखी थीं ।

What happens when Kundalini Awakens ?( Kundalini jagran के बाद क्या होता है?)

जब भी किसी व्यक्ति की कुंडली नहीं जागरण होता है उसके बाद में इंसान के senses पहले से ज्यादा बेहतर तरीके से काम करने लग जाते हैं । वह पहले से ज्यादा focus होकर अपनी आम जिंदगी में काम करने लगता है Kundalini jagran होने के बाद इंसान अपने आप को पहले से बेहतर समझने और जानने लगता है।

Final words for 9 Best Kundalini Jagran Karne Ka Aasan Tarika Kya Hai Hindi Me:-

इस Article के माध्यम से आज हम लोगों ने आपको यह बताया कि वह कौन से 9 best easy तरीके हैं Kundalini Jagaran करने के इस आर्टिकल के माध्यम से आज हम लोगों ने आपको कुंडलिनी जागरण से जुड़े सारे सवालों के जवाब दिए। हम आशा करते हैं कि इस आर्टिकल को पढ़ने के बाद आपको मिलने जागरण और कुंडलिनी को बेहतर तरीके से समझ पाए होंगे। मैं आशा करता हूँ कि आपको हमारा यह आर्टिक्ल Kundalini Jagran Karne Ka Aasan Tarika Kya Hai Hindi Me पसंद आया होगा । अधिक जानकारी के लिए आप हमे मैसेज भी कर सकते हैं ।

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